superman movie – सुपरमैन सिनेमा में कैसे उड़ता है ?

superman cinema me kaise udta hai ?

How does superman fly in the cinema?

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रॉकेट से भी ज्यादा उड़ते superman की पिक्चर क्या आपने देखि है ? दोस्तों आज हम आपको superman सिनेमा में कैसे उड़ता है उसके बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। 

तो दोस्तों जानते है superman movie के बारे में 

     superman movie के अंदर जो कहानी है उसके ऊपर पहले तो गौर करते है। पृथ्वी से अबजो माइल दूर एक ग्रह की बात है जिस गृह का नाम superman movie में क्रिप्टोन दिखाया गया है। और superman movie में जो इस ग्रह का नाम दिखाया है उस तरह वह ग्रह भी विचित्र है। जिसमे दिखाया गया है की हमारी  पृथ्वी जैसा वह पर वातावरण नहीं है। वहा पर नहीं समुद्र है , नहीं पर्वत और नहीं जंगल , मिटटी तक नहीं है क्योकि वह पूरा ग्रह क्रिप्टोनाइट नामके पदार्थ का बना हुआ है। ग्रह पूरी तरह से शांत है नील  आर्मस्ट्रांग जैसे चंद्र पर गया था वैसे ही क्रिप्टोन पर जाये तो उसे वह भी एक भी जीव देखने को न मिले।  लेकिन हां क्रिप्टोन पर लोग तो बस्ते है माना की वह लोग जमीन के ऊपर नहीं बस्ते मगर पाताल में तो उनके घर है , क्रिप्टोन के लोग जो चाहे वह कर सकते है क्योकि वह लोग पृथ्वी की मानवजात से टेक्निक में कई आगे है। और वह लोग क्यों आगे है आप जानते है ? मानवजात सालो के बाद बंदरो में से उत्क्रांति होकर बनी है , और उसके बाद अब मानवजात उत्क्रांति की और बढ़ रही है लेकिन इस मामले में क्रिप्टन ग्रह हमसे आगे है क्रिप्टन पृथ्वी से काफी पुराना ग्रह है इसलिए वह के लोग हमसे पहले ही उत्क्रांतित होकर हमसे आगे बढ़कर महामानव बन चुके है। और एक तःथ्य में बताये तो पृथ्वी के 1000 मानव और क्रिप्टोन का सिर्फ एक मानव। 

superman movie  में क्रिप्टोन ग्रह का अंत 

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     क्रिप्टोन के लोग कमनसीबदार होते है। एक दिन क्रिप्टोन ग्रह के क्रिप्टोनाइट पदार्थ में अचानक कुछ गड़बड़ होजाती है और क्रिप्टोन का  विनाश नजदीक आ जाता है जिसमे ज़ेर ऑल नामके वैज्ञानिक को पता चल जाता है की क्रिप्टोन ग्रह को अब blast होने में ज्यादा देर नहीं होगी और इसके लिए किसीको भागने तक का समय भी नहीं मिलेगा और बिचारे सब लोग भागकर जायेभी तो कहा जाये ? क्योकि क्रिप्टोन के अगल बगल में कोई भी ग्रह ऐसा नहीं था क्रिप्टोन की छोड़ो हमारी ही देखलो यदि पृथ्वी पर ऐसी कुछ विपदा आएगी तो सब लोग कहा जायेंगे ? लेकिन उस वैज्ञानिक को पता था की अबजो मेल पृथ्वी है लेकिन वह पर इस ग्रह के सभी लोग नहीं रह सकते। ज़ेर ऑल को उसके नवजात पुत्र की चिंता होती है। और उसको विचार आता है  की इस बालक को पृथ्वी की और भेज दिया जाए तो ? क्रिप्टोन के blast होने में यह बच्चा बच जाये ऐसी उसकी  कामना रही होगी। 

 superman  movie  में ज़ेर ऑल का supperman  को पृथ्वी की और भेजना 

     ज़ेर ऑल के पास ज्यादा टाइम नहीं होता है वह उस  नवजात को रॉकेट में बिठाता है उस रॉकेट का बटन दबाता है। और उसके साथ की रॉकेट अंतरिक्ष की और रावण हो जाता है। और कुछ  क्रिप्टोन ग्रह  बहुत बड़े धमाके साथ ख़त्म हो जाता है और उस ग्रह में रहने वालो में से कोई नहीं पता है। इस तरफ लम्ब्वबी यात्रा करके superman  का रॉकेट पृथ्वी पर पहुँचता है। और इसमें क्या हुआ  वह तो छोटे से superman   को  कुछ पता ही नहीं होता है। पुरे  सफर में रॉकेट का हैंडलिंग कम्प्यूटर के द्वारा ही होता है और कोम्प्युटर ही रॉकेट को पृथ्वी की और लेकर आता है। जब पृथ्वी के वायुमंडल में superman का रॉकेट पहुँचता है तो उसमे ब्रेक लग्न शुरू हो जाती है और superman  के रॉकेट की गति कम होने लगती है।  उसके बाद रॉकेट और बच्चा जिस बॉक्स में आया वह दोनों अलग हो जाते है  superman का रॉकेट जाकर समुद्र में पड़ता है और वः बॉक्स के साथ superman अमेरिका के समोलविले नाम के एक गांव में गिरता है और वह भी एकतरह की सेफ लैंडिंग के साथ वह बॉक्स उतरता है। समोलविले बहुत छोटा गाँव होने की वजह से किसी का भी ध्यान उस बॉक्स की और नहीं जाता है आखिर में दो बुजुर्ग पति-पत्नी वह से निकलते है और उन्होंने देखा की कांच के एक बॉक्स में एक बच्चा आराम से सोया हुआ है वह बुजुर्ग लोग उस बच्चे  को पलने में सक्षम ना होने के कारन उस बच्चे को सहर के अनाथाश्रम में भेज देते है थोड़े ही दिनों के बाद वह बच्चा हलनचलन करने लगता है और कबाट और दूसरी कई चीज़े उठाकर फेंक देता है अनाथशरणम में सबकुछ तहस नहस कर देता है  संचालक भी  आश्चर्य में पड़  जाते है की 6 महीने के बच्चे में इतना जोर कैसे आ सकता है और वह लोग उससे परेशान होकर यदि कोई गॉड लेना चाहे तो ले जाने देना चाहिए ऐसी मनोभावना अपने मन में बनाकर रखते है।  

superman बनता है सुपरबॉय 

एक दिन कोई बिना बालक के दम्पति superman को ले जाते है और सभी संचालक रहत की साँस लेते है क्रिप्टन का  यह बेटा अपने नए माँ बाप को भी आश्चर्य में डाल देता है दो माइल तक स्कूल जाने के लिए एक छलांग ही काफी थी superman के लिए मोटर का पंचर होने पर तैयार बदलने के  लिए एक ही जटके  में पूरी मोटर को उठा लेता था! डॉक्टर का इंजेक्शन तो उसके शरीर में लगता ही नहीं था ! यह सब देखने के बाद उसके माँ बाप को लगा की उसका बच्चा एक सामान्य बालक तो नहीं है यह एक सुपरबॉय है जिसका नाम आगे चलकर superman होने वाला था। एक बार उसके माँ बाप superman  को समजाते है की ‘ उसके पास अपर शक्ति का भंडार है। लेकिन यह शक्ति वह किसी को भी न दिखाए क्योकि दिखने  पर लोग उसको राक्षश मानेगे और उससे दूर भागते फिरेंगे।  और उन्होंने superman को यह सलाह दी की वह इस शक्ति का उपयोग जब मानवजाति की भलाई करनी हो तभी करे ‘आज्ञाकारी superman  अपने माँ बाप की आज्ञा को तुरंत अमल में लाता है , और उसका वर्तन एकदम से बदल जाता है। किसी को भी उसकी दिव्यशक्ति का ख्याल नहीं रहता कुछ साल ऐसे ही बीत जाते है उसके साथ साथ superman की ताकत भी बबढ़ती  रहती है।  अब वह ट्रैन से भी ज्यादा गति से दौड़ रहा होता है उसकी छाती पर बन्दूक की गोली लगे तो गोली भी फूल के जैसे निचे गिर जाती है , एक्सरे जैसी दृष्टि से वह दिवार के आरपार देख पाता है और वह जब चाहे उतनी स्पीड से आकाश में उड़ सकता है , मतलब अब सुपरबॉय पूरी तरह से superman  बन चूका है।   मगर उसके यह पराक्रम देखने के लिए उसके माँ बाप जिन्दा नहीं रहते है , फिर भी उसके माँ बाप की दी हुई सलाह को याद रखकर वह अपने आप को छिपाकर ही रखता है। पृथ्वी की मानवजात के जैसे ही superman रहता है।  अपनी जादुई शक्ति वह कुछ भी कर सकता है , सत्ता , पैसे , बिज़नेसमेन कुछ भी बन सकता है लेकिन उसको इन सब में कोई भी दिलचस्पी नहीं थी। वह अपने लिए नहीं बल्कि दुसरो की भलाई के लिए अपनी शक्ति का उपयोग करता था। खुद का गुज़ारा करने के लिए superman ” daily planet ” नामके समाचार में रिपोर्टर की नौकरी करता है। समाचार पत्र में उसका नाम क्लर्क केंट  के नाम से प्रचलित होता है। superman के बारे में किसी को भी पता नहीं था।  


  मगर कहते है ना महामानव का अस्तित्व ज्यादा दिन तक छुपकर नहीं रह सकता है , कोई भी आफत मानवजात पर आते ही superman उनकी मदद के लिए  निकल पड़ता , कही उसको मशीनगन चलने वाले बदमाशों से जूझना पड़ता है , तो कभी रेलवे का बेकाबू इंजन को रोकना पड़ता है , कही पर टूटे हुए विमान को पकड़कर जमीं पर लाना होता है और कही पर तो त्रसवादियो द्वारा एक्टिव किये गए परमाणुबॉम्ब  को अंतरिक्ष में छोड़ के आना हो ! superman  बिचारा लोगो की मदद करे या फिर रिपोर्टर बनकर समाचार पत्र में जॉब करे। 


superman movie कैसे बनी उसके बारे में रोचक जानकारी 

superman movie में  जिस आदमीने superman का रोल किया है उसका नाम है जेरी सिंगेल। करीबन 50 साल पहले जेरी  अमेरिकामे 16 डॉलर per month  से नौकरी करता था और बहुत गरीबी में जीवन बीता रहा था। उसे मैगज़ीन पढ़ने का बहुत ही सौख था।  जिसमे टार्ज़न की फलेश गॉर्डन की कथा वह पढ़ा करता था। ऐसे ही पढ़ते पढ़ते उसने अपने विचारो से एक ऐसा पात्र ढूंढ निकला को बहुत ही हिम्मतवाला , बुद्धिशाली हो जिसे कोई भी शस्त्र मार न सके लेकिन ऐसा  आदमी धरती पर तो हो ही नहीं सकता ? धरती पर तो  सिर्फ man हीरहते है superman  नहीं।   उसके लिए जेरी सिंगल ने एक रास्ता निकाला और उसका नाम  था क्रिप्टन ग्रह। जिसमे उसने ग्रह की तबाही और superman की पृथ्वी पर एंट्री दिखाई। कथा तो बहुत अच्छी लिखी थी , लेकिन जेरी को चित्रकाम आता नहीं था इसलिए उसने वह काम अपने मित्र जो शूष्टरस को दिया। शूष्टरस   बेरोज़गार था इसलिए उसने भी चित्र बनाने में हामी भरदी।  उसने बहुत मेहनत से चित्र को आकर दिया और superman का लाल -नील रंग वाला चित्र बनाया , और एक और चित्र जिसमे superman आकाश में  था  एक और चित्र में वह एक मोटर को उठा रहा था। इतनी सारी मेहनत के बाद जब जेरी और उसका दोस्त जब चित्रकथा दिखने गए तो जवाब क्या मिला पता है ? ” थर्ड क्लास ! सभी लोगो ने यही कह दिया “

superman असली जैसे नकली सीन 

       दोनों मित्र निराश हो गए !चार सालो तक वह कई प्रकाशनों को दिखाते रहे लेकिन दुर्भाग्य से किसी ने उनको भाव नहीं दिया। आखिर में थक हार कर वह डिटेक्टिव कॉमिक्स  नाम की एक मैगज़ीन के ऑफिस पहुंचे।  यह मेगज़ीन काफी  था और इसमें केवल चित्रवार्ता ही प्रकशित होती थी। जेरी और उसके दोस्त ने कुछ भी करके उनको राज़ी किया !मगर उसमे भी मैगज़ीन वालो ने कहा की हर एक रंगीन पेज पर 10 डॉलर मिलेंगे उससे ज्यादा नहीं यदि आपको ठीक लगे तो हामी भरिए वरना चलते बनिए। दोनों मित्रो के पास हां कहने के आलावा कोई रास्ता भी नहीं था फिर भी  उन्होंने यह डील स्वीकार कर ली मगर फिर भी डिटेक्टिव कॉमिक्स में उनकी पोस्ट पब्लिश नहीं हुई। उनके पप्रकाशकों को डर था इतनी बड़ी मैगज़ीन में यह चित्रवार्ता छपने का इसलिए उन्होंने एक नया मैगज़ीन शुरू किया जिसका नाम था  एक्शन कॉमिक और उसमे उन्होंने superman की चित्रलेखा की छपाई शुरू  की। मेगज़ीने के फ्रंट  पेज पर मोटरकार को  ऊँचा करने वाले पोस्टर को देखते ही  सामायिक को खरीदने लगे।  लोगो को यह वार्ता ऐसे भ गयी की लोग उसकी दूसरी चित्रवार्ता की राह देखने लगे। यह देखते हुए जेरी और उसके दोस्त को तुरंत ही काम पर लगना पड़ा क्योकि देखते ही देखते superman  की   250000 कोपिया बीक चुकी थी। और अमेरिका में superman का नाम गूंज उठा। 

      आज केवल अमेरिकामे ही नहीं , बल्कि पुरे विश्व में superman का नाम है , अप्रैल 1938 में एक्शन कॉमिक का  पहला अंक आया था जिसके बाद superman की कई चित्रवार्ता मार्किट में  आई। SUPERman के आधारित एक टेलीविज़न सीरियल भी बानी है जजों 104 हप्तो की है। superman के ऊपर कूल 69 कार्टून फिल्म्स और 5 फिल्म बानी है। इस तरह ही superman के कपडे ,  चड्डी , चादर ,नोटबुक्स के आलावा कई चीज़े superman के नाम से मार्किट  में बीक रही है। इसमें सबसे ज्यादा आकर्षित superman movie की वजह से हुआ। क्योकि उस में superman उडाता दिख रहा है बिल्कुल  फाइटर जेट की तरह।  फिल्मो में superman को फोटोग्राफी ट्रिक से उसे उड़ता हुआ दिखा रहे है। 

superman के कैमरे की करामात 

     1948 में पहली बार superman की फिल्म बनी तब फोटोग्राफर को ट्रेकबाज़ी करना नहीं आता था। superman को हवा में कैसे उड़ाया जाये यह कैसी को भी पता  नहीं था। परिणाम स्वरूप उड़ने  दृश्य में कार्टून का इस्तेमाल होता था। जब भी उड़ने का सीन आये तो हीरो वन, टू , थ्री बोले उसके बाद कार्टून का सीन आ रहा था जिसमे  कार्टून उड़  रहा होता है।  जिससे यह फिल्म किसी को भी पसंद  न आयी और फिल्म की जगह लोग मेगज़ीन को ही पसंद  करते रहे। इस तरह करीबन 40 साल निकल गए फोटोग्राफी की कुछ करामाते भी खोज निकाली गई। 1978 में superman  के नाम पर पहली रंगीन फिल्म का शूटिंग शुरू हुआ। उस ज़माने में यह फिल्म  बनाने में 4  करोड़ डॉलर की लागत आई , लेकिन दुनियाभर के थिएटर  में  इस फिल्म ने 25 करोड़ डॉलर का वयापार किया। 

उड़ता हुआ नहीं बल्कि टंगा हुआ superman 

         इस फिल्म की कामयाबी   बाद superman-2 , superman-3 , superman-4 फिल्मे बानी  जिसमे एक्टर  क्रिस्टोफर रीव ही थे।  क्रिस्टोफर ने इस फिल्म से काफी सक्सेस हासिल की आज  उसके  पास सबकुछ है पैसा , गाड़ी बांग्ला  खुद का एयरोप्लेन भी है।  हम्हे यह देखना है उस   ज़माने में superman उड़ता कैसे था। इस फिल्मो  की शूटिंग के दौरान कई  नुस्खों  का  यूज़ किया  गया था , सबसे  पहले तो superman आकाश में बहुत दूर हो इसके  लिए उन्होंने  superman के कई  कठपुतले बनवाये थे। जिसमे एक कठपुतले की किम्मत 10000 डॉलर थी। क्योकि यह पुतले रिमोट कण्ट्रोल आधारित थे। वीडियो रिकॉर्डिंग करने के लिए एक पुतले को बांधकर उसको हलके तारो से केन के साथ बांध दिया जाता था , और केन को चलाने पर पुतला भी उसके साथ उड़ता हुआ दिख रहा था। यह भी ध्यान रखना था की पुतले के साथ बंधा हुआ तार दिखना नहीं चाहिए। इस तरह के कई नुस्खे इस पिक्चर में दिखाए गए लेकिन लोग उसके पकड़ सके नहीं।  





































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