प्याज की खेती / onion farming in india

 प्याज की खेती के बारे मे जानकारी 

नमस्कार दोस्तों,  जैसा की आप जानते है की हम हमारी पोस्ट मे कोई भी एक फसल लेते है और फिर उसके बारे मे पूरी चर्चा करते है। तो आज का हमारा विषय प्याज़ है। जी हा वही प्याज़ जिसे सब इतना पसंद करते है की सलाद की प्लेट मे थोड़ी सी भी ना छोड़े या ऐसा भी हो सकता है की आप इसकी दुर्गन्ध को सख्त नापसंद करते हो। फिर भी गुणों से लबरेज इस प्याज को भूलना सायद मुमकिन नहीं होगा क्योंकि यह कब्ज़ा भी दूर करता है और आँखों की रौशनी भी अच्छी रखता है। यह मधुमेह को भी नियंत्रित करता है और आपके दिल की सेहद का भी ख़ास ध्यान रखता है। हमारी इस पोस्ट मे हम आपको इसकी खेती से जुडी हुई जिसमे प्याज़ की खेती कैसे करते है और बीजो के बारे मे जानकारी देंगे। 

प्याज़ की खेती


अनुक्रम 

1- बीज के बारे मे जानकारी 
2- बीज का उपचार कैसे करें 
3- प्याज़ का रोपाई का तरीका 
4-प्याज़ मे कौन सी खाद डाले 
5- खरपतवार कैसे दूर करें 
6- सिंचाई के बारे मे जानकारी 

बीज के बारे मे जानकारी 

दोस्तों बीज से ही फसल है एक कहावत है। जैसा बीजोगे वैसा काटोगे। भारतवर्ष मे प्याज़ की खेती कई सालो से हो रही है। और सवाल है प्याज़ को पसंद या नापसंद करने का तो इसके बहुत से कारण है कुछ लोग दुर्गन्ध की वजह से तो कुछ लोग धार्मिक संस्कारो की वजह से प्याज़ को नापसंद करते है। प्याज़ भारत मे हिमाचल से लेकर कन्याकुमारी तक सभी जगहों पर उगाया जाता है। प्याज़ की कई किस्मे ऐसी है जो अलग अलग जगह पर अलग अलग जलवायु मे उगाई जा सकती है। 

भारत मे सबसे ज्यादा पॉपुलर किस्मे है वह है N-53 या रत्नार पूसा की रत्नार।  लेकिन आज के युग मे प्राइवेट कंपनियों इतनी आ गई है बीज के साथ मार्किट मे की बीज की भरमार हो गई है। और एग्री फाउंडे और आरका किस्मे देती थी भारतवर्ष मे उनके बीज भी आजकल उतने ही इस्तेमाल होते है जैसे किसानो को मिलते जाये। 

कुछ प्याज़ की किस्मे ऐसी है जिसे कांटेक्ट फार्मिंग मे जैन irigation वाले ऊगाते है। और वह यह कहते है की आप प्याज उगाई ऐ आप जितना प्याज़ ऊगाऐगे हम खरीद लेंगे आपसे। उससे वह लोग प्याज़ का सूखा पावडर भी बनाते है।
और इसके लिए अलग किस्मे है। 

हाईब्रीड प्याज के बीज 

हाईब्रीड प्याज़ मे एक तो लालिमा है और एक 
कीर्तिमान है यह दो हाईब्रीड ऐसे है जो कही भी आसानी से मील जाते है। और यह कही भी और किसी भी मौसम मे लगाए जा सकते है। प्याज की फसल ऐसी है जो खरीफ मे भी उगाई जा सकती है और रवि मे भी उगाई जा सकती है। 

प्याज़ के बीज का उपचार कैसे करें 

आम तौर पर बाजार मे जो बीज आता है वह उपचार करके ही आता है। उपचार की विधि भी इतनी हो गई है की आपको कोटेद सीड बाजार मे मिलता है। और koted मे जो फफूँद नाशक है वह ख़ासतौर पर दिए जाते है। और अगर कोई कीटाणु ऐसे है जो परेशान कर सकते है उनका भी ध्यान रखा जाता है। और आपको उपचार किया हुआ बीज नहीं मिला है तो बीज के उपचार मे दो चीज़ो की बड़ी आवश्यकता रहती है। एक तो फफूँद नाशक बीज के ऊपर लगाया जाए और दूसरा कैप्टन मिलता है बाजार मे उसको प्रति किलो 2 ग्राम लगाना आवश्यक रहता है। 

उसके बाद बीज की बिजाई नर्सरी मे की जाती है।  जिसमे आम तौर पर क्यारी छोटी होती है। जो 2 मीटर से 3 मीटर की क्यारी होती है जिसमे पानी की सुविधा रहती है। जिससे बीज को पानी दिया जा सके,  बीज निकल रहा है तो उसको आसानी से निकला जा सके। और इसके अगल बगल के कूड़ा भी बना सकते है जिससे पानी की आवश्यकता कम रहती है। बीज को इन क्यारी मे लाइन मे बोना चाहिए ताकि निकलने मे सुविधा रहे. अगर उपचार करने के बाद कोई बीमारी आ जाती है तो हम उसका ठीक से उपचार कर सके और उसका लाभ उठा सके। अगर फिर भी बीमारी आती है तो मेंकोजेब दवाई आती है उसका इस्तेमाल 2 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से करना चाहिए। क्योंकि क्यारी मे आमतौर पर फफूँद वाली बीमारी समझे ज्यादा आती है। तो सबसे पहले पौध ऊगा देंगे फिर पौध जब 30 से 35 दिन की हो जाएंगी यानि तक़रीबन 5 इंच की हो जाए उसको फिर रोपाई के लिए इस्तेमाल करें। रोपाई करने से पहले भी दोबारा जो जदवाला हिस्सा है उसको फिर menkojeb मे 2 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से भीगा दीजिये। ताकि जब यह नई भूमि मे जा रहा है तो वहा पर नया प्रकोप हो सकता है उसके लिए पौधा तैयार रहेगा। 

प्याज़ की रोपाई का तरीका 

प्याज़ की रोपाई मे सबसे अच्छा तरीका यह रहता है की आप खेत मे छोटे छोड़े मैड की क्यारी बना लीजिये और मैडम के दोनों और उसकी बुआई करें। जिसमे दूरी 5 से 6 सेंटीमीटर तक की रखनी चाहिए। उसमे सबसे बड़ा फायदा है की जो निचे बल्ब बनता है वह बड़ा बनता है। और  जो मैड है उसमे उसको पूरी जगह मिलती है कोई रोकाव  नहीं होता है। और नालियों मे से पानी भी पर्याप्त मात्रा मे मिल जाता है। हालांकि बहुत से लोग है वह समतल भूमि मे भी करते है। 

प्याज़ मे कौन सी खाद डाले 

खाद के बारे मे कहा जाता है की घर मे पड़े तो कूड़ा खेत मे पड़े तो हिरा। प्याज़ की खेती मे हम सिफारिश करते है 10 से 15 टन प्रति हेक्टेयर देसी खाद डालनी अच्छी मानी जाती है।अगर आपके पास नहीं है तो जितनी है उतनी डाल दीजिये।  लेकिन साथ मे रासायनिक खाद भी देनी चाहिए। प्याज़ के लिए फॉस्फेट, पोटाश और सल्फर 50 किलो प्रति हेक्टेयर देनी चाहिए। और नाइट्रोजन है वह 100 से 150 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से देनी चाहिए। नाइट्रोजन की खाद है वह एक बार मे सारी भी दी जाती है और थोड़े थोड़े अंतराल पर भी दी जा सकती है। प्याज़ की खेती मे सबसे ज्यादा खाद पानी के साथ देनी चाहिए। 

खरपतवार कैसे दूर करें 

प्याज़ के लिए दो तरह के खरपतवार नाशक का प्रयोग हम बताते है। खेत की तयारी से पहले खेत की मिट्टी के अंदर चलाने वाला एक basalin नामक रसायन है जिसको हम 1.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से स्प्रे कर दीजिये और उसके बाद एक बार हल चला दे तो इसकी वजह से जो बीज पड़े हुए है खरपतवार के जो पैदा होंगे तो तुरंत ही नष्ट हो जायेंगे। 

दूसरा यह है की जब हमने रोपाई कर दी उसके बाद खरपतवार आ सकते है तो ऐसा खरपतवार नाशक चाहिए जो प्याज़ को नुकसान ना करें और खरपतवार दूर करें। वह एक pwndimethilin नाम से दवाई आती है वह भी 1.5 किलो पर हेक्टेयर पानी मे घोल के स्प्रे कर देते है तो खरपतवार नस्ट हो जाते है। 

सिंचाई के बारे मे जानकारी 

पानी अगर समतल खेत है तो उसमे 15 दिन के बाद पानी देना आवश्यक होता है। प्याज़ नाली और मैडम के ऊपर लगाया गया है उसमे पानी कम लगता है। और वह 10 दिन के बाद दिया जाता है। और dreep irigtion मे 3 दिन के अंतराल सिंचाई करनी चाहिए। 

प्याज़ की खेती मे रवि पार्क मे 15 दिन के अंतराल सिंचाई करनी चाहिए यदि आपने समतल जमीन पर फसल लगाई है तो। खरीफ मे गर्मी ज्यादा पडती है इसलिए 10 दिन के अंतराल सिंचाई करनी चाहिए। 
आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी कमेंट मे जरूर बताये,  धन्यवाद। 









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