मूंगफली की खेती और मूंगफली की खेती कैसे करें

 मूंगफली की खेती के बारे मे जानकारी 

मूंगफली का नाम लेते ही आपके मन मे नमक या तीखी चटनी या फिर गुड का ख्याल भी आ गया होगा. मूंगफली खाते खाते लोग समय काटा करते है. मूंगफली का इस्तेमाल टाइमपास के तौर पर भी किया जाता है. मूंगफली जो है वह गरीबो का बादाम है. मूंगफली मे 22 से लेकर 28 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है. मूंगफली ने 10 से लेकर 12 प्रतिशत karbohaydret पाई जाती है. और वशा 48 से लेकर 50 प्रतिशत तक पायी जाती है.  विश्व  स्वास्थ्य संगठन की एक 
रिपोर्ट कहती है की भारत जैसे देश मे या फिर विकाशशील देशो की बात की जाए तो उसमे बताया गया है की यदि कुपोषण से लड़ना है तो उसमे मूंगफली एक बहुत ही अच्छा जरिया साबित हो सकती है. 

मूंगफली की खेती कैसे करें


अनुक्रम

  1. मिट्टी का चुनाव कैसे करें 
  2. बीज का चुनाव कैसे करें 
  3. बीज का उपचार कैसे करें 
  4. ध्यान मे रखने वाली बाते j
  5. सिंचाई कैसे करें 
  6. खरपतवार के बारे मे 

मिट्टी का चुनाव कैसे करें 

जहाँ तक मिट्टी के चुनाव का प्रश्न है उसके लिए हलकी बलवार दोमट और या बलवार दोमट जो होती है इसके लिए उपयुक्त मानी जाती है. क्योंकि इसमें जो मूंगफली का विकास होता है और इसमें से जो रेस निकलते है तो उस समय मुख्य बात यह होती है की हमारी मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए कठिन मिट्टी नहीं होनी चाहिए. बलवर मिट्टी जो होती है वह ज्यादा कठोर नहीं होती है. तो इस मिट्टी मे जल का निकास भी बहुत अच्छी तरीके से होता है. 

बीज का चुनाव कैसे करें 

मूंगफली मे प्रजाति के अनुसार बीज के चयन किया जाता है. अगर मोटे दाने की प्रजाति है तो उसमे बीज की मात्रा अलग होंगी और छोटे दाने की है तो उसमे भी मात्रा अलग होंगी. मूंगफली ज्यादा बढ़ने वाली है तो उसकी मात्रा अलग होंगी और कम बढ़ने वाली है तो उसकी मात्रा अलग होंगी. यानि की एक ही फार्मूला सब पर लागु नहीं होता आपको चयन करना पड़ेगा की आपको कैसे प्रजाति चाहिए. 

उदाहरण के तौर पर हम चंद्र वेरायति को लेते है. चंद्र बहुत अच्छी नस्ल है तो 70 से 75 किलो बीज की आवश्यकता पडती है. और यदि चित्र नस्ल को लेते है तो 65 से 70 किलो बीज लगते है. परन्तु जो फैलने वाली वेरायति है कौशल और प्रकाश इसमें 95 से लेकर 100 किलो तक बीज लग जाता है. 

बीज का उपचार कैसे करें 

दोस्तों जो लोग कहते है की हमारे खेत मे बीमारी लग गई रोग लग गए उसका मुख्य कारण यह है की किसान बीज उपचार करना भूल जाता है. किसी भी फसल मे जो बीज जनित रोग है जो बीज से उत्पन्न होते है उसके लिए बीज का उपचार किये बिना उसे बोना उचित नहीं है. इसी लिए दोस्तों जो बीज है उसे thiram,    मिल जाता है तो thiram 1 किलोग्राम बीज के लिए 2 ग्राम thiram चाहिए होता है. इसके लिए सबसे पहले बीज को पानी छिड़क छिड़क के थोड़ा गिला कर दीजिये. और उसके बाद thiram डाल कर उसको मिला दीजिये. और हिलाने से thiram की पूरी परत बीजू के ऊपर चिपक जाती है. और इस तरीके से यह बीज जो है वह उपचार हो जाता है.
 
मूंगफली के बीज मे एक चीज और है की जड़ो से नाइट्रोजन प्रस्थापित होती है इसके लिए rayjobian कल्चर आता है इसके लिए आधा लीटर पानी लेते है और उसके बाद 50 ग्राम गुड को पानी मे मिला देते है. और उसके बाद उस पानी मे rayjobian कल्चर का 250 ग्राम का एक पैकेट आता है उसको मिला देते है. अब ध्यान मे रखने वाली बात यह है की rayjobiam कल्चर से उस उपचार करने के बाद सूरज की रौशनी तेज होने से पहले यानि की सुबह या फिर शाम को इस बीज को अवश्य बो देना चाहिए. 

ध्यान मे रखने वाली बाते 

दोस्तों जब फसल बढ़ने लगी है तो उसमे मुख्य बिंदु यह आते है की इसमें बुआई के समय कितना उर्वरक डाला है कितना उर्वरक हमें बाद मे इस्तेमाल करना है जिसमे बुआई के समय नाइट्रोजन की आवश्यकता कम लगती है. जिसमे बुआई के समय नाइट्रोजन की मात्रा -20 किलो,  पोटाश -45 किलो,  फॉस्फेट - 60 किलो, jipsm - 250 किलोग्राम,  boreksh - 4 किलोग्राम की आवश्यकता पडती है 

उर्वरक कब और कैसे डाला जाये 

टोटल नाइट्रोजन,  पोटाश और फॉस्फेट और उसके साथ आधा jipsm इतना तो बुआई से पहले की कूड़ा मे डाल दीजिये. उसके बाद बचने वाला उर्वरक है उसे फसल के 25 से 30 दिन होने के बाद खेत मे डाल दिया जाता है. जिसमे आधा jipsm और boreksh डाला जाता है. 

सिंचाई कैसे करें 

मूंगफली मे दो ऐसे स्तर आते है जब पर्याप्त मात्रा मे खेत मे नमी होना आवश्यक है. ज़ब जड़ो से रेसे निकलने शुरू हो जाते है तब मिट्टी यदि कठिन होंगी तो यह रेसे निकल नहीं पाएंगे इसीलिए रेसे निकलते वक्त पर्याप्त मात्रा मे खेत मे नमी होना आवश्यक है। दूसरा जिस वक्त फली बन रही है उस वक्त खेत मे सिंचाई करना परम आवश्यक है। 

खरपतवार का ख्याल कैसे रखे 

खरपतवार को दो तरीको से नस्ट किया जा सकता है। एक तो आप रसायनो का प्रयोग कर सकते है। और अगर समय पर हम रसायनो का इस्तेमाल नहीं कर पाते है तो फिर खुरपी के द्वारा निकाई गुड़ाई करके हम खरपतवार को नस्ट कर सकते है। यदि रसायनो के द्वारा यदि हमें खरपतवार नस्ट करने है तो जैसे ही हम मूंगफली की बुआई करते है उसके तुरंत एक या दो दिन के बाद pendametelin - 3.3 लीटर को 700-800 लीटर पानी मे घोल करके छिड़क दीजिये। लेकिन विशेष इस बात का ध्यान रखे की यदि आपने मूंगफली के जमने के बाद इस दावा को छिड़का तो आपकी फसल पूरी नस्ट हो जाएगी। इसलिए इसके लिए बहुत सावधानी रखने की जरुरत है की बुआई के एक से दो दिन के बाद आप छिड़काव कर दीजिये। 
 दोस्तों आखिर मे मे आपको इतना बतादू की आपको चाहिए आपकी त्वचा लचीली और मुलायम तो भी आप मूंगफली का सेवन कर सकते है या फिर आप मूंगफली के तेल का भी सेवन कर सकते है,  धन्यवाद। 








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