organic farming पर kovid-19 का प्रभाव

 organic farmer पर corona virus के प्रभाव 

  हेलो दोस्तों , आज हम बात करेंगे kovid - 19 के प्रभाव से खेती पर क्या प्रभाव पड़ा है इसके बारे में। जिसमे एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट क्या कर रहा है साथ में एग्रीकल्चर कंपनी क्या क्या कर रही है यह भी हम आपको बताएंगे तो आज की पोस्ट में हम बात करेंगे organic farming  की।  दोस्तों यदि आप सोच रहे है  की आपको organic farming करनी चाहिए तो  आपके लिए यह पोस्ट महत्वपूर्ण साबित होगी।  

organic farming पर kovid-19 का प्रभाव

organic farming का विश्लेषण 

  कोरोना वायरस का संकट पूरी दुनिया में आया हुआ है। लेकिन किसान भाइयो के लिए एक बहुत बड़ा अवसर भी खुला है की पूरी दुनिया में 35 % जितनी जैविक उत्पादनो की मांग बढ़ी है। ऐसे समय में सरकार को और निति सुधारने की जरुरत है। ताकि हम जैविक खेती को  कार्यक्रम के रूप में चला सके। जब भी हम एकल फसल प्रणाली को जैविक खेती में लेकर चलते है तो हमको कई समस्याओ  का सामना करना पड़ता है। कुछ ऐसे तरीके है जिसके आधार पर हम इन फसलों को साथ लेकर चल सकते है। 

   दोस्तों अभी तक हमारा उत्पादन जो है वह मंडी के  जरिए जाता था। इस बार भारत सरकार ने कोरोना काल में मंडी अधययन भी किया है। आप jaivikkheti.com के जरिए और कई अलग तरीके से हम बाजार को खोज  सकते है। अब हमको यह सोचना पड़ेगा की हमें बाजार में दाम की मांग ना करते हुए बाजार की व्यवस्था को नए सिरे से कड़ी करे। और हम किसान भाईओ से यह निवेदन करते है की इस बात को गंभीरता से लेकर के आगे बढे। यही एक समूहिक प्रयास है जिससे हमको पूरा दाम ही नहीं पूरे दाम मिलने की पूरी व्यवस्था है। 

   मजदूरों के पलायन से खेति किसानी में आये बदलाव 

   इस आपातकाल में बहुत सारे लोग जो बहार काम करते थे वह अपने गाओ वापस लौट गए।  अब दो प्रकार से प्रभाव बढ़ गया एक तो गाओं में काम करने वाले लोग थे  और दुसरे जो बहार से लोग आये है। और वह अब बहार जाना भी नहीं चाहते थे। इसलिए कार्यक्रम को अच्छी तरह से बनाने के लिए कुछ तरीके भारत सरकार की तरह से खोले गए है। आपने हाल ही ,में सूना होगा की मनरेगा में यह तय किया गया की लघु  और सीमांत किसान भी उसी श्रेणी में आएंगे यदि वह अपने खेत पर काम करते है तो उनका भी कार्ड बनेगा और उनको मनरेगा  भी मनरेगा में जोड़ा जायेगा और मनरेगा से मिलने वाले लाभ उनको भी मिलेंगे। साथ ही ऐसे लोग जो अपना रोजगार करते थे वह रोजगार भी अब मनरेगा के द्वारा दिया जाएगा। इस तरह से कई कार्यक्रम किये जाएंगे। 

  उदहारण के तौर पर हम आपको  बताना चाहेंगे की उत्तरप्रदेश राज्य में 40 से 41 जिल्लो में मनरेगा को कन्वर्जन्स करते हुए बांस के रोपण के साथ साथ जड़ीबूटियों की खेती की बात सामने आई। उत्तरप्रदेश सरकार ने बहुत सही समय पर एक सटीक योजना बनाई है।  हालाँकि योजना बहुत लम्बी है इसमें बांस का पौधा भी 3 सेव् 4 साल में तैयार होगा उसके बीच में जो जडीबुटियों  की खेती है  जिससे हमें सालभर में उत्पादन भी बराबर मिलता रहेगा। और जो ऐसे जंगल पड़े हो अथवा ग्राम पंचायतो की जमीन है छोटे किसानो की जमीन है सामूहिक रूप से उसके ऊपर जैविक खेती होगी। तो यह एक सरल उपाय है गाओं में रोजगार देने का।  

बांस की खेती के बारे में 

हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की बहुत समय से एक मांग थी की खेत में मेड का प्रताप आये।  खेत पर मेड खेत सुरक्षा से और जैविक सुरक्षा से भी बहुत कारगर है। आर्गेनिक फार्मिंग में तो पहले से ही उसकी बफर जोन में स्थापना थी। बांस की एक महत्वपूर्ण भूमिका यह है की बांस एक बार लगने के बाद लगभग 50 से 60 साल तक चलता है। तो किसानो को रेग्युलर आमदनी का जरिया उससे  मिलता है। दूसरी बात बांस का प्रयोग हमारी दिनचर्या से जुड़ा  हुए है। हम उसका उपयोग कर सकते है। 
   बांस का उपयोज कागज के लिए  , ईंधन के लिए , इमरती लकड़ी के रूप में और सजावटी चीज़ो के रूप में यानि की हेंडीक्राफ्ट  के रूप में। तो बांस एक उपयोगी पौधा है जैसे दोस्तों बांस के कंधो से आचार भी बनाया जा सकता है। तो  खानेपीने से लेकर दिनचर्या से भी जुड़ा हुआ है बांस। बल्कि पुरातन इतिहास तो ययह तक कहता था की जन्म से लेकर मरण तक बांस  रिस्ता है मनुष्यो के साथ। किसान भाई इसकी खेती 2 तरीको से कर सकते है एक तो 15 से 20 फुट के अंतर  में लगाए ताकि और भी खेती होती रहे और 3 से 4  साल के बाद बांस अपने आकर में आ जाए। जो लोग पुरे खेत में बांस लगाना नहीं  चाहते वह लोग खेत के मेड पर बांस लगाए। 

   किसानो की आय दुगना करने का काम न तो सरकार  का है , न तो निति आयोग  का है , न तो कृषि अनुसन्धान संस्थाओ  का है यह काम है किसानो का।  किसानो को खुद अपनी जैविक खेती में मिलनेवाली सुविधाओं को परखने की जरुरत है। आप सामूहिक खेती करे। देश में जड़ी बूटियों खेती होने से किसानो को काफी लाभ मील सकता  है। दोस्तों रस्ते इतने बढ़ गए है की आपको खुद आगे बढ़ना  होगा। हम क्यों दूसरो से अपेक्षा करे की सरकार दूगनी करेगी या वैज्ञानिक दुगना करेगा।  

दोस्तों हमारी यह पोस्ट आपको कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताये , धन्यवाद। 

चने की खेती की जानकारी 



    

















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