बाजरे की खेती कैसे की जाती है और बाजरे की संकर प्रजाति

 बाजरे की आधुनिक खेती 

बाजरे की खेती कैसे की जाती है और बाजरे की संकर प्रजाति
बाजरे की खेती 



नमस्ते , दोस्तों खेती किसानी की इस पोस्ट में आपका हार्दिक स्वागत है। दोस्तों आज हम ऐसी फसल के बारे में बात करेंगे जिसकी रोटियां खाने में जितनी स्वादिस्ट है उतने इसमें गुण भी है इसीलिए शायद अक्षर हमारी दादी नानी इस बात पर जोर देती है की बाजरे की रोटी के साथ गुड खाये क्योकि इसे खाने से हड्डिया मजबूत होती है और खून की कमी भी नहीं होती है।  और इसीलिए शायद हमारे देश में बाजरे की खेती बड़े पैमाने पर होती है और इसका मुनाफा भी किसानो को ज्यादा मिलता है। तो दोस्तों आज हम बात करेंगे बाजरे की खेती कैसे की जाती है और बाजरे की संकर प्रजाति कौन  कौन सी है।  
 
  दोस्तों पहले हमारे देश में गेहू की पैदावार बहुत कम थी।  और ज्यादातर मोटा अनाज है जैसे बाजरा उसकी पैदावार बहुत ज्यादा होती थी।  इसीलिए देश में मोटा अनाज के खाने का प्रचलन था।  जैसे जैसे गेहू की पैदावार वैज्ञानिक आधार पर होने लगी तो इससे बाजरे की पैदावार कम होने लगी।  गेहू के भाव बाजरे  से कम होते है इसीलिए किसान सोचता है की बाजरे को मार्किट में बेच दिया जाये और गेहू को खाया जाये। बाजरा  ज्यादातर ठंडे प्रदेशो में खाया जाता है क्योकि बाजरा जो है वह गरम होता है। 

बाजरे की खेती के लिए सही मौसम 

   40 से 50 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा वाले जो क्षेत्र है उनमे बाजरा अच्छे तरीके से और अधिक उपज के साथ उगता है।  और यदि ऐसे क्षेत्र में बरसात निरंतर  होती रहती है तो बाजरे की खेती में सिंचाई की भी जरुरत  नहीं पड़ती। 


बाजरे की खेती के लिए मिटटी  बलुई धोमठ मिटटी सबसे सर्वोत्त्तम  मानी जाती है।  दोस्तों  आपको अधिक बरसात वाले क्षेत्रो में बाजरा नहीं उगाना चाहिए। और जहाँ जलभराव ज्यादा होता है वहां भी बाजरे की खेती अच्छी नहीं होती है। 

बाजरे की खेति के लिए आवश्यक उर्वरक तत्व 

   दोस्तों  हम जब बाजरे की खेती के लिए तयारी करते है तब खेत में 40 से 50 क्विंटल गोबर की खाद या कम्पोस्ड खाद का इस्तेमाल करे। उर्वरक का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले जरुरी मिटटी पलटने वाले हल  से एक बार जुताई कर ले।  उसके बाद खाद को खेत में मिला देने के बाद दो तीन जुताई देसी हल से कीजिय जिससे खाद पूरी तरह से मिटटी में मिक्ष हो जाएगी और आपको ज्यादा लाभ मिलेगा। 

   जहां पर देसी हल उपलब्ध नहीं है वहां पर हम कल्टीवेटर का प्रयोग करते है और प्रति एक जुताई के बाद पाटा लगाना आवश्यक है ताकि मिटटी जो है वह भुरभुरी हो जाये।  इसके बाद जब हमारा खेत बीज बोने की परिस्थिति में होता है तब आपको यह ध्यान रखना होगा की बाजरे की दो जातियां है एक हायब्रिड  और दूसरा देशी तो यदि हमारी संकर जाती जिसे हायब्रिड कहते तो उसके लिए निचे दिए गए उर्वरक का इस्तेमाल करे।  


संकर जाती के लिए 

नाइट्रोजन 100 किलो 

फॉस्फेट 40 किलो 

पोटाश 40 किलो  की आवश्यकता पड़ती है।  

देशी जाती के लिए 

नाइट्रोजन 50 किलो 

फॉस्फेट 25 किलो 

पोटाश 25 किलो की  आवश्यकता पड़ती है।  

अब दोस्तों प्रश्न यह उठता है की आप इसका प्रयोग कैसे करे?

  दोस्तों आपको इस बात का ध्यान रखना होगा की नाइट्रोजन की आधी मात्रा , और फॉस्फेट और पोटाश की पूरी मात्रा यह जब हम कुंड में जब हम बो रहे है तो कुंड में बोते समय नै या चोगा के द्वारा डायरेक्ट बीज के संपर्क में ना आये इस तरह से उर्वरक को डालिये  इसके बाद बुआई करे।  उसके बाद आपने आधा नाइट्रोजन बचा करके रखा है उसको 25 से 30 दिन के बाद इसको फसल में दे दीजिये जिससे आपको अधिकतर लाभ मिलेगा।  

बाजरे के बीज को उपचारित करने का तरीका 

  बाजरे के बीज को उपचारित करने का सबसे सही तरीका यह है की बीज को आप हल्का सा पानी से छिंटकव करते जाइए और बाजरे को चलते जाइए।  सारा बीज जब नमी पकड़ ले तो उसके बाद हम उसके ऊपर दवा डालेंगे तो दवा जो है वह चिपकती चली जाएँगी। पानी की नमी के कारण दवा आराम से बाजरे के ऊपर चिपक जाती है। उसके बाद हल्का  सा उसको साये में सूखा के इसकी बुआई कर सकते है।  

बाजरे के बीज के बारे में जानकारी और उसका भण्डारण 


बाजरे के बीज प्रमाणित एजेंसी है या कृषि उपचार  केंद्र है वहां से ले तो आपके लिए अच्छा होगा  और यदि आप अपना ही बीज बनाना चाहते है तो ऐसी दशा में जो स्वस्थ बाले है उनको अलग निकाल लीजिये और निकल लेने के बाद उन बालो को खूब अच्छी  तरह से  सूखा लीजिये। सूखा लेने के बाद उसमे से बीज निकल लीजिये और उसका रसायन के साथ भण्डारण करके रख दीजिये जिससे उसमे कीट न लगे और बीज  हमारा सवस्थ बना रहे।

   दोस्तों गांव में तो जो किसान जिसको अधिक मात्रा में बाजरा नहीं बोना है वह किसान तो लकड़ी की राख मिलाकर रख देते है जिससे बाजरे में कीड़ा नहीं लगता है।  और यदि आपको ज्यादा मात्रा में बाजरा रखना है तो आप जिसभी बर्तन में बाजरा रखने  वाले है उस बर्तन में क्लोरोपारिफ़र से  सोधित कर लीजिये और उसके बाद उस बर्तन को धुप में रख दीजिये।  जिससे बीज में जो भी कीड़े लगने की गुंजाईश होती है वह ख़तम हो जाती है। और फिर बीज को मिस तरह से रखे की जिससे उसमे हवा न जा पाए और ऊपर से उसका मुँह बंध  कर दीजिये।  

बाजरे की बुआई कैसे की जाती है इसके बारे में जानकारी 

   बाजरा की बुआई कुंडो में की जाती है। और बोते समय इस बात का ध्यान रखे की जिस कुंड में हमने बीज डाला है उसके बाद हम जब दूसरा कुंड खोले तो पहले कुंड में जब बीज गिरा है उससे दुसरे कुंड के बीज की लाइन से लाइन की दूरी 50 सेंटीमीटर हो जनि चाहिए। 

   बाजरे की सिंचाई   में यह ख़ास ध्यान रखे की जब आखिर में बरसात नहीं होती है और बाल में जब फूल आते है तब खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है।  और उस पर्याप्त नमी को बनाये रखने के लियए यदि बरसात नहीं हो रही है तो सिंचाई करना परम आवश्यक है। और उसके बाद 8 से 10   दिनों के बाद एक और सिंचाई कर देनी चाइये। 

दोस्तों आज हमने आपको बाजरे की खेती और उसकी संकर  प्रजाति  के बारे में जानकारी दी यदि आपको हमसे कोई भी प्रश्नार्थ है तो हमें कमेन्र्ट करके जरूर बताए , धन्यवाद। 


















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