तोरई की खेती और तोरई की खेती करने का तरीका

 तोरई की उन्नत खेती 

दोस्तों , हमारी इस पोस्ट में आप सबका बहुत बहुत स्वागत है। आज हम बात करेंगे की किस तरह आप तोरई की फसल तैयार करे। उसकी मिट्टी कैसी होनी चाहिए , मिटटी की जांच कितनी जरुरी है और कहा कहा पे आप किस तरह से तोरई की पैदावार  ले सकते है इस मुद्दे पर हम इस पोस्ट में बात करेंगे , तो दोस्तों आइये देखते है तोरई की उन्नत खेती। 
तोरई की खेती और तोरई की खेती करने का तरीका


तोरई की फसल के बारे में जानकारी 

   तोरई एक ऐसी फसल है जिसको ज्यादा विपन्न के लिए  मार्केटिंग के लिए  बहुत दूर नहीं भेज पाते है। इसलिए इसको लोकल ही ज्यादा ग्रो किया जाता है। इसकी खेती भारत के पहाड़ी क्षेत्रो को छोड़कर सभी जगह की जाती है। यह सब्जी ठंडी जलवायु पसंद  नहीं करती है।  जहा ज्यादा बारिश  होती  है वह भी तोरई  नुक्सान होता है। सभी मैदानी इलाको  में इसकी खेती की जाती है।  

    यह एक  हरी सब्जी के रूप में बेचीं जाती है। यह बहुत पुराणी किस्म की सब्जी है जो हमारे देश में कई सदियों से उगाई  जाती है। और आम आदमी इसको खाना पसंद करता है। इसलिए इसकी बाजार में मांग अच्छी है।  यह सस्ती और लोकल होने के कारन इसको कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जाता। 

तोरई की खेती के लिए मिटटी कैसी होनी चाहिए जानिए 

     तोरई  की खेती धोमठ मिटटी में बहुत अच्छी होती है।  अगर ज्यादा बलवार  तो भी अच्छा नहीं है क्योकि उसमे पानी ज्यादा देना पड़ता है। आजकल ज्यादा पानी देने से डीज़ल की जरुरत पड़ती है सिंचाई के लिए। तो तोरई  के लिए बलुआ दोमट मिटटी  सर्वोत्तम है।  इसका ph  7 के करीब सबसे अच्छा रहता है। हमारे देश में क्षरी होने की वजह से 7 से अधिक ph होने की संभावना ज्यादा होती है। `ज्यादा ph होने से आवश्यक तत्व पौधे को नहीं मील पाते है इसलिए ph का ख़ास ध्यान रखे।  

  अगर आपका ph  8 या 8 से ऊपर है तो इसके लिए आप जिप्सम का उपयोग करके ph  की मात्रा को कम कर सकते है। मगर जिस भूमि में दूसरी फसल हो रही है मतलब तुरई की फसल भी हो सकती है ज्यादातर जगह पर जिप्सम का उपयोग नहीं करना पड़ता है।  

  तुरई की खेती में तीन पोषक तत्वों की अधिक मात्रा में जरुरत पड़ती  है और वह है नाइट्रोजन , फोस्फरस  और पोटाश।  और इनका हम खाद के रूप में प्रयोग करते है। और जिंक और बोरोन की मात्रा कम रहती है। 

मिटटी की तैयारी कैसे करे 

   पहले भूमि पलटने वाले हल से एक बार जमीन को पलट दीजिये।  और उसके बाद कल्टीवेटर से खेत की मिटटी को भूरभूरी बना दीजिये और उसको समतल करदे जिससे आपको पानी देने या फिर सिंचाई में परेशानी नहीं होगी। 

तोरई के बीज बोन की प्रक्रिया 

   तोरई के बीज लाइन से लाइन की दूरी 1 मीटर रखिए।  क्योकि यह बेलवाली फसल है इसलिए इसका अंतर रखना पड़ता है।  गर्मी में पौधे से पौधे की दूरी थोड़ी कम रखनी पड़ती है इस बात का ख़ास ध्यान रखे।  तोरई की खेती बरसात में भी की जाती है और गर्मी में भी की जाती है। तो दोनों में सिंचाई भी बदल जाती है।  बरसात में तो तोरई को पानी की आवश्यकता नहीं होती है।  मगर 25 दिनों तक बारिश न हो तो हलकी सिंचाई करनी चाहिए। 

   तोरई की सिंचाई गर्मी के मौसम 4 -5 दिनों के अंतराल में सिंचाई करे। क्योकि गर्मी में वातावरण में नमी काफी कम होती है और गरमी बहुत अधिक होती है। तोरई के फल कई महीनो  जब यह आना शुरू करे तो वह लगातार आते रहते है।  

तो दोस्तों , किस  तरह से आपको तोरई फसल लगानी है , किस हिसाब से उसके खेत तैयार करने है जिससे आपको अधिक से अधिक फायदा मिले।  में उम्मीद करता हु की आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आयी होगी , धन्यवाद।  














  

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