सोयाबीन की खेती कैसे होती है और उसके बारे में जानकारी

 सोयाबीन की उन्नत खेती 

     नमस्ते , दोस्तों खेती किसानी हिंदी में आपका हार्दिक स्वागत है।  आज हम बात करेंगे सोयाबीन की हम अक्सर सोयाबीन के तेल में बने पकवान खाते है। उसी सोयाबीन को उगाने में और उसके लिए क्या क्या सावधानी बरतनी पड़ती है आज हम जानेंगे। सोयाबीन की खेती में भारत 4 वे स्तन पर है। विश्व में पहला स्थान अमेरिका का है , दूसरा स्थान ब्राज़ील का है , तीसरा अर्जेंटीना का है और चौथा स्थान भारत का है और पांचवा स्थान चाइना का है। 90 % सोयाबीन का उत्पादन इन 5 देशो में से ही होता है।  भारत में इस समय इसकी पैदावार खाद्य तेल के रूप में ही किया जाता है। 

सोयाबीन की खेती कैसे होती है  और उसके बारे में जानकारी



     भारतवर्ष में तेल की अन्य फसलों में सोयाबीन का पहला स्थान है। विश्व में सोयाबीन की खेती 113 मिलियन हेक्टर में की जा रही है। और इसका उत्पादन 284 बिलियन टन है। और भारतवर्ष  में सोयाबीन की खेती 12 मिलियन हेक्टर में की जा रही है।  और इसका उत्पादन 13 मिलियन टन है। और हमारे क्षेत्र  में इसका उत्पादन और क्षेत्र फल बढ़ रहा है जिससे आनेवाले दिनों में भारत में इसका उत्पादन बढ़ सकता है। सोयाबीन को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी गोल्ड बीन के नाम से जानते थे। 

सोयाबीन में आनेवाले मुख्य घटक 

  1. सोयाबीन में 40 प्रतिशत प्रोटीन होता है 
  2. 30 प्रतिशत कार्बोहायड्रेट होता है 
  3. 20 - 22 प्रतिशत तेल पाया जाता है 
सोयाबीन की खेती के लिए बलवर धोमठ , धोमठ और मठियार जमीन होनी चाहिए और इसमें उत्पादन अधिक आता है। सोयाबीन की खेती में जल निकास अति आवश्यक है। अलग अलग क्षेत्रो में यह ध्यान रखा जाता है की हमारे क्षेत्र में सोयाबीन को कौन सी बीमारी लगती है। तो उसके हिसाब से सोयाबीन में यह विशेष ध्यान रखना चाहिए की हम उस प्रजाति का चुनाव करे की उस क्षेत्र में वह बीमारी उस प्रजाति में न हो। 

सोयाबीन में आने वाली प्रजातियां 

1 =   पि के - 472 नमक प्रजाति 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टर 30 से 35 क्विंटल उपज देती है। 

2 = जे एस -71 -5  नामक प्रजाति 100 से 105 दिन में तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टर 25 से 28 क्विंटल उपज देती है। 

३ - पूसा -20 नामक प्रजीतिया 110 से 115 दिन में तैयार हो जाती है और 30 से 32 क्विंटल उपज प्रति हेक्टर मिलती है।  

4 - पूसा - 16 नामक प्रजाति 110 से 115 दिन में तैयार हो जाती है और 25 से 35 क्विंटल उपज प्रति हेक्टर देती है। 

5 - पि इस -564 नामक प्रजाति 115 से 120 दिनों में तैयार  हो जाती है और 25 से 30 क्विंटल  उपज प्रति हेक्टर देती है।  

6 - एम् इ यु इस - 47 नामक प्रजाति 85 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है और 25 से 30\क्विंटल उपज प्रति हेक्टर देती है। 

7 -  एन आर सी - 37 नामक प्रजाति 100 से 105 दिनों में तैयार हो जाती है और 25 से 30 क्विंटल उपज देती है। और यह प्रजाति विशेष क्र जलसा  रोग के लिए अच्छी है।  

सोयाबीन के बीज के  बारे में जानकारी 

     सोयाबीन के बीज का आकर एक सामान ही होता है छोटा बड़ा नहीं होता है। इसिलए 70 से 80 किलो प्रति हेक्टर इसका बीज लगता  है। लेकिन यह देख ले की बीज का अंकुरण 70 से 80 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। अगर अंकुरण कम है तो बीज की मात्रा को बढ़ाना आवश्यक हो जाता है। 

बीज का उपचार कैसे करे  

   इसके लिए 2  ग्राम खीराम और 1 ग्राम कार्बनडा जिम दोनों मिलाके उसका मिश्रण करके  इस्तेमाल करे। अगर यह दोनों किसी वजह से नहीं  मिल पता है तो बायो फिनेट मिथाइल १.५ ग्राम का इस्तेमाल कीजिये। 

सोयाबीन की खेती के लिए 200 क्विंटल प्रति हेक्टर गोबर की खाद डाले।  गोबर की खाद डालने से जड़ो में बेक्टेरिया का विकास जल्दी होता है। 

बुवाई का तरीका 

बुवाई के लिए लाइन से लाइन की दूरी - 45 सेंटीमीटर 
                     पौधे से पौधे की दूरी - 3 से 5 सेंटीमीटर का ध्यान रखते हुए बीज की बुआई करे।  

सोयाबीन की खेती में उर्वरक का इस्तेमाल कैसे करे जानिए 

        सोयाबीन की खेती में  नाइट्रोजन की अधिक आवश्यकता नहीं होती है इसीलिए  20 किलो नाइट्रोजन , 80 किलो फॉस्फेट और 40 किलो पोटाश का इस्तेमाल करे और  साथ साथ 200 किलो जिप्सम का इस्तेमाल करे।  जिप्सम की मात्रा बढ़ने से सोयाबीन के सोया में तेल की मात्रा बढ़ती है। 

        इन उर्वरक का इस्तेमाल खेत में बुआई से पहले ही क्र लीजिये और इसके बाद बुआई करे।  बुआई के 30 से 35 दिन के बाद एक या दो  पौधे के उखाड़ करके देखिये की सोयाबीन के पौधे में बेक्टेरिया वाली गाँठ बनी है की नहीं बनी है।   यदि किसी वजह से गाँठ नहीं बनी है तो 20 किलो नाइट्रोजन का छंटकाव कर दीजिये। 

सोयाबीन की खेती में सिंचाई कैसे करे जानिए 

   सोयाबीन जो है वह बरसात की फसल है। इसमें सिंचाई की ज्यादा आवश्यकता  नहीं होती है लेकिन अगर फूल आने के और  फली आने के टाइम पर अगर नमी पर्याप्त मात्रा में नहीं है तो फूल आने के और फली आने के टाइम पर एक एक सिंचाई करदे। इतनी सिंचाई सोयाबीन के लिए पर्याप्त होगी।  

सोयाबीन में होने वाले रोग 

   सोयाबीन में सबसे ज्यादा होनेवाला रोग है पिला चित्रावरण रोग।  पिलाचित्रावरण रोग का वायरस  जो होता है इसमें सफ़ेद मक्खी एक पौधे से दुसरे पौधे में फैलाती है। इसमें पत्तिया पिली पड़\ जाती है और उसके बाद पत्तो में फीति पद जाती है उसके बाद पत्ते सूखने लगते है। इसके लिए आप रोगप्रतिरोधी प्रजाति का ही चयन करे उसके बाद मिथाइल ओ डिबिटन =  25 सीसी  को एक लीटर प्रति हेक्टर को 700 से 800 लीटर पानी में घोलके उसका छिड़काव करे तो इसका उपचार हो जायेगा। 

   तो दोस्तों आज  की इस पोस्ट में हमने देखा की सोयाबीन की खेती कैसे होती  है और उसके बारे में नयी नयी जानकारी भी पायी , आपको कोई भी प्रश्नार्थ के लिए कमेंट बॉक्स में कमेंट करे , धन्यवाद।  






















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