नीम के बीजो से शक्तिशाली कीटनाशक बनाने की विधि / निम्बोली से कीटनाशक / organic pesticide by neem seed

नीम की फली से शक्तिशाली कीटनाशक बनाने की विधि 

neem

आज हम आपको सभी प्रकार की सब्जी की जो फैसले है उसमे कीटनाशक का काम करे और उसमे खर्चा भी न आये ऐसी कीटनाशक दवा बनाये।  आज हम बात करेंगे नीम की जो निम्बोली होती है मतलब नीम का जो बीज होता है उससे कैसे कीटनाशक बनाते है यही फार्मूला में  आज आपको बताऊंगा।  

जैविक कीटनाशक बनाने के लिए लगनेवाली चीज़े 

   इस बनाने के लिए आपको नीम की फली चाहिए होगी जो आपको खेतो में कही भी आसानी से मील जायेंगे।  जून और जुलाई महीने में सबसे ज्यादा नीम और नीम की निंबोली मिलती है।  समय निकालकर आप निंबोली तोड़ ले , 2  किलो नीम के बीज लीजिये और उसके बाद आपको चाहिए होगा एक ग्राइंडर मशीन , और आपको करीबन 15 लीटर गौमूत्र की आवश्यकता होगी।  

जैविक कीटनाशक बनाने की विधि 


सभी  चीज़े मील जाने के बाद ग्राइंडर में थोड़ी निम्बोली हम डालेंगे , और उसके बाद ग्राइंडर में साफ़ पानी डालेंगे थोड़ा सा ही पानी डालेंगे , और पानी डालने के बाद ग्राइंडर शुरू करना है।  ग्राइंडर चलने के बाद उस प्रवाही को हमें 15 लीटर गौमूत्र में डाल देना है। इस तरह धीरे धीरे करके नीम की साडी निंबोली को पीस दीजिये और उसके बाद उसे गौमूत्र में डाल दीजिये।  प्रवाही और गौमूत्र को मिक्ष करने के बाद उसमे से कड़ी खूसबो आएगी और उसका रंग हल्का पीला हो जायेगा।  सब काम ख़त्म हो जाने  के बाद हमने जिस भी बाल्टी में गौमूत्र और निंबोली का रस मिक्ष किया है उस बाल्टी को आपको 7 दिन तक कोई भी अच्छे और साफ़  कपडे से ढंक देना होगा।   सात दिन के बाद एक बाल्टी में 45 लीटर साफ़ पानी में यह गौमूत्र वाली बाल्टी को एक अच्छे से कपडे से छानकर पानी में दाल दीजिये।  इसके बाद दोस्तों आपका नीम का जैविक कीटनाशक तैयार है।  आप उसे इस्तेमाल कर  सकते है।  


नीम का कीटनाशक कहा कहा इस्तेमाल करे 

नीम के कीटनाशक को कोई भी फसल हो चाहे वह कपास की हो , सोयाबीन की हो , बैगन की हो , किसी भी सब्जी की फसल हो या चाहे वह बागबानी हो तो इसमें आप महीने के अंदर 2 बार छंटकाव करे।  महीने में 2 बार छंटकाव करके आपको इसका बहुत अच्छा रिज़ल्ट मिलेगा।  

निम्बोली के कीटनाशक का इस्तेमाल करने के फायदे 

मेरे किसान भाइयो निंबोली के अंदर बहुत से एंटी बायोटिक तत्व पाए जाते है।  जो जितने भी प्रकार के पत्तो के रोग आते है उन रोगो को यह कण्ट्रोल करता है तो किसान भाइयो चाहे  वह रोग जैसा भी हो चाहे वह लटका रोग हो , चाहे वह सफ़ेद मक्खी का रोग हो चाहे वह लेप मनेर का रोग हो किसी भी प्रकार  का सब्जियों पे रोग है तो उसपे आप आराम से प्रयोग कर सकते हो।  

निम्बोली कीटनाशक के  दूसरे फायदे 

  कोई किसान भाई किन्नो की बगौनि करता है या अंगूर की खेती करता है बागबानी के ऊपर भी यह बहुत लाजवाब काम करता है  निम्बोली के कीटनाशक को आप दूसरे तरीके  से भी दे सकते हो 45 लीटर पानी और 15 लीटर कीटनाशक मिलकर 60 लीटर हो  गया तो इस 60 लीटर को आप आराम से फसलों की जड़ो के पास टपक सिंचाई पद्धति के द्वारा दे सकते हो।  ड्रीप से देने पर सब्जियों में यह महीने के अंदर तीन बार पानी के साथ दो।  इससे कभी भी पौधे में नीवा तोड़ की बीमारी नहीं होगी  , कभी जड़ गाँठ की प्रॉब्लम नहीं होगी , कभी  दीमक की प्रॉब्लम नहीं होगी और पौधों की जड़ो को बहुत सा फायदा मिलेगा और पोषकतत्व मिलेंगे।   इससे पौधा तेजी से बढ़ेगा और  निरोगी भी रहेगा।  

यह दोनों प्रकार से काम  करता है किसानभइयो  इसे आप छंटकाव करलो और चाहे इसको आप जड़ो  के अंदर देदो हमने आपको इसके दोनों फायदे और इसको किस तरह से बनाते है और किस तरह से इसका इस्तेमाल करते है।  यह दवा बिना खर्चे की है धन्यवाद।  

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