मक्के की खेती कैसे करे और मक्के की खेती के बारे में जानकारी

 मक्के की खेती


        नमस्ते  दोस्तों , खेती किसानी की इस पोस्ट में आपका हार्दिक स्वागत है। दोस्तों आज हम ऐसी फसल के बारे में बात करेंगे जो सेहद का खजाना है। इसकी खासियत यह है की पकने के बाद इसकी पौश्टिकता बढ़ जाती है। कैंसर के पेशंट के लिए बहुत ही फायदेमंद है और आँखों के लिए बभी फायदेमंद है।  प्रोटीन और विटामिनयुक्त है मक्का तो दोस्तों आज हम बात करेंगे मक्का की खेती की और उससे जुडी हुई जानकारी की  , धन्यवाद। 

मक्के की खेती कैसे करे और मक्के की खेती के बारे में जानकारी

मक्के की खासियत 

    दोस्तों जिस तरह हम लोग गेहू की रोटी खाते है उसी तरह से मक्का भी एक पौष्टिक आहार है। इसमें कार्बोहायड्रेट बहुत ज्यादा पाए जाते है। इसके साथ हम मक्क को रोटी के साथ इस्तेमाल करते है और साथ ही साथ हरे भुट्टे के तौर पर भी खाया जाता है। विदेशो में तो मक्का को जानवरो को भी दिया जाता है ताकि उससे जानवरो में दूध की क्षमता बढ़ जाये। 

मक्के की खेती कैसे करे 

        मक्के की खेती के लिए बलवार धोमठ या धोमठ भूमि बहुत उपयुक्त होती है। उसमे सबसे पहले दो से तीन जुताई कर लीजिये और कर लेने के बाद देसी हल से एक बार जुताई करे। और  खेत में मिटटी जो है वह भुरभुरी रहनी चाहिए। मक्के की खेती में जुताई करने के समय एक बात ख़ास ध्यान में ले की खेत में कही भी जल भराव न हो और पानी का अच्छा सा निकाल हो। उसके बाद दोस्तों मक्के की खेती में यह देखना पड़ेगा की हम जिस भूमि पर मक्के की खेती करनेवाले है उसका उर्वरा स्तर क्या है ? उसके लिए आपको मिटटी की जांच करवानी होगी जिससे आपको पता चल जायेगा की जमीन में कौन से   उर्वरक है और कौन से उर्वरक की कमी है ! 

     मक्के की खेती के लिए आवश्यक उर्वरक तत्व 

  1. नाइट्रोजन 
  2. फॉस्फेट 
  3. पोटाश 
  4. जिंक 

संकुल मक्का में आवश्यक  उर्वरक तत्व 

  1. 150 किलो नाइट्रोजन 
  2. 75 किलो फॉस्फेट 
  3. 60 किलो पोटाश 
  4. 25 किलो जिंक 

संकूर मक्क में आवश्यक उर्वरक तत्व  

  1. 120 किलो नाइट्रोजन 
  2. 60 किलो फॉस्फेट 
  3. 40 किलो पोटाश 
  4. 25 किलो जिंक 
सल्फर भी मक्का के लिए बहुत जरुरी है इसलिए मक्का में सल्फर भी 40 किलो इस्तेमाल करना चाहिए। 

मक्के की खेती में  कीटनाशक का इस्तेमाल कैसे करे 

      दोस्तों , मक्के  की खेती में हर कीट के अनुसार अलग अलग कीटनाशकों का इस्तेमाल होता है। एक कीटनाशक को हम हर एक कीट के ऊपर इस्तेमाल नहीं कर सकते है। जैसे ही आपकी फसल 20 से 25 दीं की हो जाती है तो आप  लिन्डन व् 6 प्रतिशत ग्रेन्युल 20 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से इस्तेमाल करे तो तना छेदक मक्के में नहीं लगेगा। और यदि आपको लिन्डन नहीं मिल पता है तो आप 3 प्रतिशत कार्बोफ्यूरान २० किलोग्राम प्रति हेक्टर के हिसाब से ले। 

     मक्का की जैविक खेती 

      मक्के की फसल में जैविक दवा का छंटकाव करने के लिए नीम के बुरादे में 2 .5  किलो लहसुन और 2 .5  तम्बाकू की पति पानी में मिलाकर घोल बनाए और फिर इसको 700 से 800 लीटर पानी में मिलकर के इसको छंटकाव करते है तो हम  कीटनाशकों से छुटकारा पा सकते है। 

   मक्के में आनेवाले रोग और उससे कैसे छुटकारा पाए 

     मक्के में कई ऐसे रोग होते है जो बीज जनित रोग होते है। जब बीज का अंकुरण होता है तो यह कीटाणु सीधे ही पौधे में आ जाते है। इसमें दो मुख्य रोग है एक है तुलासता और दूसरा है पत्तियों का जूलसा रोग। अगर इनका उपचार करने के  लिए हम बीज को पहले ही उपचारित करले तो इन दोनों बीमारियों से हम 80 % तक लाभ उठा सकते है। यदि किन्ही कारणवस अगर किसान को  पहले से ज्ञात नहीं है अथवा उनको रसायन प्राप्त नहीं हो पा रहे है तो ऐसी अवस्था में यह जो तुलासता रोग है इसके लिए आपको उपचार करना चाहिए।  एक इसके लिए रसायन आता है रिडोमिल।  इसको 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर छंटकाव करे तो तुलसता रोग का प्रभाव बहुत ही कम हो  जाएगा। 

     दूसरा रोग है पत्तिओ का जुलसा रोग। इस रोग में बड़े अंडाकार धब्बे पड़ते है इसके उपचार के लिए एक रसायन है उसको 2 किलोग्राम प्रति हेक्टर अथवा जिंक मॅग्नीज़ कार्बनडा जिम को 2 किलोग्राम प्रति हेक्टर में 700 से 800 लीटर  पानी में घोलके छंटकाव कर दीजिये इससे आपका पत्तियों का जूलसा रोग चला जायेगा। 

   हमारे किसान भाई कोई गलत कीटनाशक का इस्तेमाल न करे इसके लिए सरकार ने हर तहसील स्तर पर कृषि रक्षा इकाइयां खोल दी है और विशेष रूप से किसान भाइयो को यह कहा जाता है की सभी किसान कृषि रक्षा इकाई से ही रसायन ख़रीदे। उसमे आपको दो लाभ मिलते है एक तो बाजार से ख़रीदे रसायन में कोई  गेरेंटी नहीं होती और दूसरा वह लोग मनमाने ढंग से पैसा लेते है। और सरकार ने रसायन का एक फिक्स रेट रखा हुआ है और उसमे भी सरकार अनुदान देती है। 

मक्के में होने वाली खरपतवारसे कैसे बचे 

     रवि पाक में वह सारे खर पतवार होते है जैसे जंगली गाजर , हिरन खुरी है बथुवा है इस तरह के खरपतवार जो गेहू में होते है वैसे ही खरपतवार मक्के में भी होते है। खरपतवार कम  करने के लिए पौधे का बिजलीकरण करते है मतलब  की पौधे से पौधे  की दूरी 20 सेंटीमीटर और लाइन से लाइन की दूरी 45 सेंटीमीटर। और देर से पकने  वाली मक्का को यदि बोते है तो लाइन से लाइन की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 25 सेंटीमीटर रखे। जब पौधा 25 दिनों का हो जाता है तो निकाई और गुड़ाई करके आप खरपतवार को दूर  कर दीजिये। उससे फायदा यह होता है की खरपतवार तो निकल जाती है मगर गुड़ाई की वजह से जमीं में वायु का संचार हो जाता है। वायु का संचार और मिटटी भुरभुरी होगी उतनी ही पौधे की जेड मजबूत होगी। जब जेड मजबूत होगी तो पौधा भी अच्छा विक्सित होगा। तो उससे पैदावार भी अच्छी मिलेगी।  

  दोस्तों हमें उम्मीद है की आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी होगी , धन्यवाद।  खेती  किसानी से जुडी हुई और खबरों के लिए हमें फॉलो करे। 

















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