गेहू की खेती / gehu ki kheti

गेहू की खेती करते वक्त बुवाई का सही तरीका 

gehu ki kheti


    नमस्ते दोस्तों , खेती किसानी में आप सभी लोगो का स्वागत है आज हम बात करने वाले है गेहू की खेती के बारे में दोस्तो अमीर का महल हो या गरीब का झोपड़ा ढाबा हो या फिर पांच सितारा होटल गेहू से बानी रोटियां हर जगह मिलती है।  लेकिन क्या कभी हमने सोचा की हमारे किसान कितनी मेहनत से गेहूं की फसल तैयार करते है ? आज हम अपनी इस पोस्ट में बात करेंगे गेहूं की बुवाई कैसे  करते है , उसकी जांच कैसे करते है , मिटटी की जाँच  कैसे करते है , जुताई का  क्या सही तरीका है ? 

गेहूं की जैविक खेती

   गेहूं के लिए सबसे उपयुक्त मिटटी धोमठ या वल्वाट धोमठ मिटटी सबसे उपयुक्त होती है।  गेहू  के लिए  समतल भूमि सबसे अच्छी फायदेकारक है।  दोस्तों  हमें जिस भी खेत में गेहू की फसल लेनी हो उस खेत  में हमें मिटटी पलटने वाले औजार से दो से तीन बार जुताई करनी पड़ती है।  

गेहू की खेती के लिए मिटटी की जाँच 

  गेहूं  की खेती  के लिए जैसे हर फसल से पहले मिटटी की जाँच करवाते है ठीक वैसे ही गेहूं  बुआई के पंद्रह दिन पहले  मिट्टी की जाँच करवाए।  

मिटटी का नमूना कैसे ले 

- पेड़ के निचे से नमूना न ले 

- पहले से खाद का ढेर लगाया हुआ है तो वह से नमूना न ले 

- ऊँचे खेत का नमूना अलग ले 

- निचे खेत का नमूना अलग ले 

- 0 से 6 इंच का गड्ढा खोदकर नमूना ले 

- 1 किलो के करीब मिटटी रह जाने के बाद उसमे से 500 ग्राम मिटटी निकालके उसको प्लास्टिक की थैली में दाल दीजिये।  

- उसी प्लास्टिक की थैली को फिर कपडे की थैली में डाल दीजिये और उसके बाद मिटटी को प्रयोगशाला में भेज दिज्ये।  

गेहू की खेती के बारे में रोचक जानकारी 

       भारत एक विशाल देश है।  और यहाँ की जलवायु अलग अलग क्षेत्रो के अनुसार जलवायु में परिवर्तन होता है।  और कभी बारिश में भी परिवर्तन  हो जाता है।  इसिलए  कृषि  वैगनानिकोणे भारत के काई क्षेत्रो को कृषि की दृष्टी से अलग - अलग कर दिया है।  उसी के अनुसार जो जातीय विक्सित की है हमें उस क्षेत्र में वही जाती विक्सित करनी चाहिए।  

      यदि हमने पहले धान की खेती की है और धान की खेती  में देरी हो गई है और विलम्ब से हम गेहू की बुआई करते है तो विलम्ब से हम 25 दिसंबर तक प्रत्येक अवस्था में बुआई कर देनी चाहिए। इसीलिए जो पैदावार हमारी भूमि के लिए सही हो उसी का चयन करे वर्ना हमारी पैदावार सही नहीं होगी।  

खेत में खाद कितनी डाले 

  यदि आपको सर्वोत्तम उपज प्राप्त करनी है तो 60 क्विंटल पर हेक्टर गोबर की खाद खेत की तयारी करते समय पहली ही जुताई में इसको डाल के खेत में मिला देना चाहिए।  

मैदानी क्षेत्र या पहाड़ी क्षेत्र में गेहू की खेती 

  मैदानी क्षेत्र या पहाड़ी क्षेत्रो में जो बड़े किसान है वह वैज्ञानिक तरीके से बुआई करते है।  और उसमे शीट बेल का प्रयोग करते है।  और उसमे फर्टिलाज़र अलग होता है और बीज का प्रयोग भी अलग होता है।  और उसके आधार पर बीज की मात्रा निर्धारित कर दी जाती है उस हिसाब से उसमे पेर हेक्टर बीज भी पड़ जाते है और  हमें जो उर्वरक डाल न है उसी हिसाब से उसमे उर्वरक का भी वितरण हो जाता है।  मैदानी क्षेत्रो में जहा पर विलम्ब से पकने वाला धान जब खेडूत उसके बाद गेहू की बुआई करते है।   उसके लिए रोटावेटर का इस्तेमाल करलेना चाहिए।  

  पहाड़ी कई जगह ऐसी भी होती है जहा पर ट्रेक्टर से फार्मिंग नहीं हो सकती।  कई खेत बहुत  बड़े होते है और कई खेत छोटे होते है। कई में बेलो के द्वारा खेती हो जाती है  कई खेतो में तो चढ़ाई की वजह से नहीं हो पाती।  और जो खेत बहुत छोटे होते है उसको खेडूत रस्सी और पावड़े से जुताई  कर लेते है।  मिटटी को भुरभुरा कर लेते है और उसमे खाद डालने के पश्चात उसकी बुआई करते है।  

बुआई करते वक्त क्या कोई  ऐसा तरीका है जिससे मजदूरों की कम लगत हो ? 

   यदि हम कृषि यंत्रो  प्रयोग करे तो हमको मजदूरों की लागत बहुत ही कम होगी।  या हमने अपने सीड है उसमे खाद भर दिया और उसके बाद ट्रेक्टर द्वारा या बेलो द्वारा बुआई करते है तो हमारी जो बीज बोने की जो विधि है वह अधिक विक्सित होती है और अच्छी पैदावार मिलती है।  और खेडूतो के लिए नया यंत्र आया है रोटावेटर।  यह रोटावेटर एक ऐसा यंत्र है जो एक ही बार में खेत को तैयार कर देता है और उसके साथ ही उसकी बुआई भी हो जाती है।  

गेहू की खेती के लिए प्रति हेक्टर कितने बीजो की जरुरत पड़ेगी ? 

   समय से यदि हम गेहू की बुआई करते है तो हमको 100 क्विंटल प्रति हेक्टर हमको बीज की जरुरत  पड़ती है , लेकिन यदि हमारी बुआई विलम्ब से 25 दिसंबर के आसपास हम बुआई करते है तो हम बीज की मात्रा बढ़ा करके 125 क्विंटल प्रति हेक्टर उसकी बुआई करते है।  

गेहू के बीज के उपचार का सही तरीका क्या  है ? 

   सबसे ज्यादा जरुरी यह है की जो बीज जानिक रोग होते है उससे बचने के लिए यह बहुत आवश्यक है की बीज  का सोधन कर लिया जाए।  सोधन करने के लिए यह बहुत जरुरी है की एजेक्टोबेक्टर  या पीएसवी लेकर के और उससे हम बीज का उपचार करे और उसके  बाद हम बुआई करे।  

क्या ऑर्गेनिक खेती के फायदे है ? 

       निरंतर उर्वरक का प्रयोग करने से  हमारी फसल में हमेशा वृद्धि होती है।  पंजाब में आज यह भी स्थिति हो गई है की ज्यादातर उर्वरक का इस्तेमाल करने से वह की पैदावार  कम हो गई है।  किसानो को कम उर्वरको का प्रयोग करे और खाद का प्रयोग  ज्यादा करे।   इसिलए जो जैविक खेती है उसके कई फायदा है।  













 

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