गन्ने की खेती कैसे करे और ganne ki kheti

 गन्ने की खेती के बारे में 

     नमस्ते दोस्तों , खेती किसानी की इस पोस्ट में आपका हार्दिक स्वागत है। देश के एक बड़े हिस्से में गन्ने की खेती होती  हैं और आम तौर पर यह मुनाफे की खेती होती है। गन्ने की पैदावार लेने वाले किसान न केवल गन्ने की पैदावार से लाभ ले सकते है साथ में वह देश में चीनी उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने में भी अपना अमूल्य योगदान दे सकते है।  आज हम आपको गन्ने की खेती से जुडी हुई जानकारी और गन्ने की खेती कैसे की जाती है उसके बारे  में विस्तार से बताएंगे।  

गन्ने की खेती के लिए छोटा सा विश्लेषण 

   गन्ने की खेती जो किसान करना चाहता है उसे सबसे पहले यह देख लेना चाहिए की जिस क्षेत्र में वह गन्ने की खेती करना चाहता है क्या वह क्षेत्र गन्ने की खेती के लिए पर्याप्त या आवश्यक है। फिर आप जिस क्षेत्र में गन्ने की खेती करना चाहते है उस क्षेत्र का भूमि परिक्षण या मिटटी  करवाए।  और देखे की उस क्षेत्र की जलवायु गन्ने की खेती के लिए अच्छी है। यदि यह सब सही है तो आप गन्ने की खेती के  बारे में  सोच सकते है। 

गन्ने की खेती कैसे करे

गन्ने की बुआई के लिए  तैयारी कैसे करे 

     गन्ना 3 समय  में बोया जाता है। पहली बुआई जो है वह ओक्टोबर में होती है , दूसरी बुआई 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच में होती है , तीसरी बुआई गेहू काटने के समय के बाद की होती है। उसके बाद आप जिस क्षेत्र में है उस क्षेत्र में कौन सी प्रजाति विक्सित है उसकी जानकारी ले। सभी क्षेत्रो के लिए अलग अलग प्रजातियां विक्सित की गई है। 

     उत्तर भारत में गन्ने की खेती उत्तर प्रदेश में ज्यादा की जाती है। गन्ना एक नकदी फसल  है और इस फसल में अन्य फसल  की तुलनामे प्राकृतिक आपदाए भी बहुत कम आती है। आप गन्ने के साथ कोई अन्य फसल भी ऊगा सकते है अन्त्य फसल के तौर पे। जैसे गन्ने की फसल की दो लाइनों के बीच में आप मुंग की दो लाइने लगा सकते है।  वैसे ही आप अलद , लोभी जैसे अन्य पैदावार ले सकते है। 

     गन्ने की फसल के लिए गहरी जुताई करनी होती है साथ में खरपतवार को भी साफ़ करना होता है। और इसके साथ मिटटी में कार्बनिक खाद डालना भी जरुरी है तो इस बात का भी ख़ास ध्यान रखे। कार्बनिक खाद न केवल फसल को पोषक तत्व उपलब्ध करवा पाता है साथ में मिटटी की उर्वरक क्षमता को भी बढ़ाता है। 

गन्ने की खेती के लिए खेत कैसे तैयार करे 

     गन्ने की खेती में पहले ही 300 क्विंटल;पर हेक्टर गोबर या कम्पोस की खाद डाल दे। उसके बाद यदि आपने मिटटी की जांच करवाई है तो निर्देशानुसार नाइट्रोजन , फॉस्फेट और पोटाश की खाद भी डाल  दे।  


गन्ने की बुआई के लिए जल्दी पकनेवाली प्रजातियां 

सी औ - 687 
सी औ एस  - 8436 
सी औ एस - 88230 
सी  औ एस - 95435 
सी औ एस - 91235 

गन्ने की बुआई के लिए माध्यम या देर से पकनेवाली  प्रजातियां 

सी औ - 767 
बी औ - 91 
सी औ - 1148 

शीघ्र बोई जानेवाली प्रजातियां 

कोशा - 8436 
कोशा - 88230 
कोशा - 95255 
कोशा - 95436 
कोसे - 00235 
कोसे - 01235 

मध्य देर से बोई जानेवाली प्रजातियां 

कोशा - 8432 
कोशा - 94257 
कोशा - 92423 
कोशा पंत - 84212 
बी औ - 91 

जल प्रभावित क्षेत्रो के लिए प्रजातियां 

यूपी - 9530 
कोसे - 96436 
बी औ - 19 


बीज का चुनाव करने के बाद खेत में देशी खाद का प्रयोग करे। जो किसान भाई देशी खाद का प्रयोग नहीं कर प् रहे है वह मिटटी की जांच  के अनुसार उर्वरको का इस्तेमाल करे। और जो किसान भाई मिटटी की जांच नहीं करवाना चाहते तो निचे बताए गए उर्वरक और उसकी मात्रा  का उपयोग करे।  

गन्ने की खेती के लिए खाद एवं उर्वरक 

60 किलो नाइट्रोजन 
60 किलो फोस्फरस 
60 किलो पोटाश 
10 किलो जिंक 

यह चारो खाद को मिक्ष करके गन्ने की बुआई जहाँ पर करनी है उसके निचे डाले। बीज से ३ इंच निचे डालेंगे तो आपको लाभ ज्यादा मिलेगा। बुआई करते समय आपके खेत में पर्याप्त नमी होना बहुत जरुरी है। बीज नमी होगी तभी अच्छी तरह से जम पायेगा। 

    बीज की मात्रा प्रति हेक्टर 50 से लेकर 60 क्विंटल तक की पड़ती है। क्योकि गन्ने की प्रजातियां बहुत लम्बी होती है।  
गन्ने की खेती कैसे करे

गन्ने की खेती में बीज की मात्रा 

35 .5  हजार टुकड़े तीन आँख वाले  और 
56 हजार टुकड़े दो आँख वाले  एक हेक्टर में पड़ जाने चाहिए।  

    और दोस्तों अब देखते है बीज को उपचारित करने की अगर आपने बीज को उपचारित करके बुआई की तो आपकी फसल की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और अच्छी पैदावार  भी होती है। पर अगर किसी भी कारणवस आपने बीज को  तो निकाई  वक्त जीवाणु खाद और कीटनाशक दवाओं का उपयोग करके उसका लाभ उठा सकते है। दोस्तों बीज उपचारित करते समय दवाओं का संतुलित मात्रा में ही उपयोग करे साथ में दिए गए दिशा निर्देशों का पूरी तरह से पालन करे। ताकि आपको पूरा फायदा हो। 

     कृषि विश्व विद्यालयों द्वारा किए गए नए अनुसंधानों द्वारा बताया गया है की गन्ने के बीज को हॉट वोटर ट्रीट द्वारा उपचारित किया जा सकता है। 

हॉट वोटर ट्रीट के बारे में जानकारी 

     हॉट वोटर ट्रीट मतलब आप जान ही गए होंगे की इसका मतलब कही न कही गरम पानी से जुड़ा हुआ है। यह ट्रीटमेंट  जहाँ पर होती है वहां पर बड़े बड़े होज होते है। और इन पानी को 500' सेल्सियस में उबला जाता है। 500' में बीज को एक घंटे के लिए डाल दिया जाता है। और एक घंटे के बाद बीज को निकला जाता है।  इससे फायदा यह होता है की रोग होने वाले होते है उनसे छुटकारा मिलता है। 

    गन्ने की फसल में पानी का   प्रबंधन ज्यादा लगता है क्योंकि अन्य  फसल की तुलना में गन्ने में पानी ज्यादा लगता है। धान के बाद गन्ने की फसल ऐसी है जिसमे सबसे ज्यादा पानी लगता है। 

गन्ने की बुआई के वक्त राखी जाने वाली सावधानिया 

1 - लाइन से लाइन की दूरी 90 सेमि से 1 मीटर रखे 
2 -  पौधे से पौधे को टच करके रखना है 
3 - गन्ने की बुआई पूरब से पश्चिम रखे 
4 - गन्ने की बाहरी परत पर मिटटी अवश्य चढ़ाए 
5 - दीमक से बचाव  के लिए क्लोरी पैरिफोस का प्रयोग करे 

 आखिर में दोस्तों इतना ही कहूंगा गन्ने का रस और निम्बू साथ में मिलकर पिया जाए तो उसकी बात ही कुछ और होती है , धन्यवाद। 























     


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