चने की खेती की जानकारी / chane ki kheti

 चने की खेती 

   नमस्ते , दोस्तों आज की हमारी इस पोस्ट में आपका हार्दिक स्वागत है। खेती की छोटी से छोटी जानकारी हम अपने पोस्ट में आपको देने के प्रयास करते है। आज हम बात करेंगे चने की जिसमे हम जानेंगे की चने की खेती कैसे की जाती है और चने की खेती की जानकारी भी लेंगे।  
चने की खेती कैसे की जाती है




chane ki kheti के बारे में जानकारी 

   हमारे देश में पंजाब , उत्तरप्रदेश , राजस्थान , हरियाणा , गुजरात में ज्यादा होती है।  और इनमे सबसे ज्यादा खेति उत्तरप्रदेश में होती है। उत्तरप्रदेश में हर प्रकारकी मिट्टी पाई जाती है। चने के लिए धोमठ या मटियार मिटटी चाहिए जो की उत्तरप्रदेश में पायी जाती है। 

चने की खेती में खेत की तयारी कैसे करे 

   जब खेत में नमी होती है तभी जुताई करने से आपको ज्यादा लाभ मिल सकता है। इसलिए नमी में पहले 6 इंच मिटटी पलटनेवाले हल से जुताई करे।  और उसके बाद देसी हल से या ट्रेक्टर के द्वारा कल्टीवेटर से जुताई करे और खेत को तैयार करे। और उसके बाद खेत में पाटा लगाके खेत को समतल कर दीजिये जिससे आपको सिंचाई में कोई मुश्किल न हो। चना कभी बलवार जमीन में नहीं होता है।  क्योकि हम बलवार जमीन में हल चलाते है तो हल चल ता चला जाता है। 

    इसके बाद आपको मिटटी की जांच करवानी होगी।  जिसमे आपको पता चल जायेगा की खेत में कौन से उर्वरक की कमी है और कौन सा उर्वरक पर्याप्त मात्रा में है। इसलिए दोस्तों मिटटी की जांच आवश्यक है। 
चने की खेती में नाइटोजन की कम आवश्यकता होती है जबकि फोस्फरस की आवश्यकता अधिक होती है। 
हमारे वातावरण में 70 %नाइट्रोजन होती है और जब बरसात होती है तो पानी के द्वारा  जमीन में आती है। और दुसरे देलैनी फसलों के अंदर आप ध्यान से उसका छोड़ निकलकर  छोटे छोटे सफ़ेद बूँद होंगे यह बरसात  से आये हुए नाइट्रोजन हो होते है। 

  चने की खेती के लिए उर्वरक तत्व  नाइट्रोजन 20 किलो , फोस्फरस 60 किलो , पोटाश 20 किलो और गंधक जिसको हम सल्फर कहते है वह 20 किलो रखिये। वैज्ञानिक सोधन के आधार पर नाइट्रोजन  मात्रा बुआई के समय नहीं दी है तो आप बुआई के बाद भी आप छंटकाव कर सकते है।  लेकिन फोस्फरस , पोटाश और सल्फर  बुआई  पहले  ही इस्तेमाल कर लिया जाए तो सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त होते है। 

बुआई करने की प्रक्रिया 

   दूसरी फसलों में आपने देखा होगा हम आपको बीज का सोधन करने को कहते थे । मगर चने की फसल में  बीज  का उपचार और बीज सोधन यह  दोनों आवश्यक है। बीज उपचार करने के लिए  2 ग्राम थिरम प्रति किलो या 3 ग्राम मेंकोजेब प्रति किलो इस्तेमाल करे।  इसको देसी हल से बोते समय यह ध्यान रखे की हमेशा पूरब से पश्चिम ही इसकी लाइन बनाये। कभी भी उत्तर से दक्षिण  की और लाइन न बनाये। क्योकि जब हवा चलती है तब पूरब की हमारी लाइन है तो पूरब से हवा निकालके चली जाएगी लेकिन अगर उत्तर  बोया है तो पेड़ को पलट देगी। 

   हलके पीछे नाइ या चौगा के द्वारा उर्वरक डाले जो हमने 6 इंच गहरा बीज डाला है उससे भी गहरा उर्वरक डाले और इस तरह से बुआई करने से लाभ अच्छा मिलेगा। 

➤ फूल आने के समय कभी भी सिंचाई ना करे 

  यदि फूल आने के समय यदि बरसात हो जाती है तो यह एक प्राकृतिक आपदा इसमें हम और आप कुछ नहीं कर सकते है। 

चने की खेती में आनेवाले कीट और कीटनाशक 

  चने की खेती में 3 प्रकारके कीट लगते है 
  1. कटुआ कीट होता है यह नुकसान नुकसान नहीं पहुँचता है लेकिन अंडा देने के बाद इसमें से सूरी निकलती है यह सूरी हरे या भूरे रंग की होती है यह सीधे सीधे पौधे की टहनियों को और पौधे की जड़ को काटना शुरू कर देती है और यह रात में निकलती है और रात में ही काटना शुरू कर देती है। इसके लिए रसायन का इस्तेमाल करे और चने ले होनेवाले कीट की एक प्रकृति होती है की यह उजाले की तरफ भागते है।  सरकार  की एक योजना चल रही है।  एकीकृत नाशीकीट प्रबंधन जिसमे खेडूतो को यह बताया जाता है की रसायनो का इस्तेमाल करके पैसे को ज्यादा बर्बाद न करे।  
  2. इसी तरह से चने में फलीदार किटक लगता है।  फलीदार किटक पिले बादामी रंग का होता है। 
  3. तीसरा  कीड़ा उसे कुँवर कीड़ा कहते है।  कुँवर कीड़ा हरे रंग का होता है और इसकी पंखो पर  रूई बने होते है इसके उपचार  इन सब के बचाव के लिए 500 लीटर पानी में 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर इण्डोसल्फोन 35 ई.सी मिलकर छिड़के जिससे कीट नस्ट हो जाते है। 
दोस्तों आज हमने आपको चने की खेती के बारे में जानकारी दी ऐसी ही पोस्ट के लिए हमें फॉलो करे , धन्यवाद। 












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