आलू की खेती कैसे करें और अच्छी पैदावार कैसे ले

 आलू की खेती के बारे मे जानकारी 

नमस्कार दोस्तों,  आज के विषय मे हम चर्चा करेंगे आलू की खेती की और उसकी पैदावार की और आलू की खेती से जुडी हुई सभी चीज़ो के बारे मे बात करेंगे. 
आलू की खेती कैसे करें और अच्छी पैदावार कैसे ले

आलू की खेती के लिए कौन सी मिट्टी चाहिए 

   आलू के लिए बलवार दोमट मिट्टी को सबसे अच्छी मानी जाती है. क्योंकि इसमें कंद की वृद्धि अत्यंत आवश्यक है. जितनी वृद्धि होंगी उतनी ही हमारी पैदावार अधिक बढ़ेगी. उसके लिए मिट्टी मे बालू का संचार होना अति आवश्यक है. इसके लिए जब हम खेत की तैयारी करते है तो 2 से 3 जुताइयाँ करने के बाद खेत को खुल्ला छोड़ देते है.  और उसके बाद 1 हप्ते तक उसको खुल्ला छोड़ दिया. उसके बाद उसमे हम सिंचाई करते है.  
     सिंचाई करने के बाद जब ओट आ जाती है तब हम उसमे जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा कर लेते है. और उसके बाद हमारा खेत बुआई के लिए तैयार हो जाता है. 

आलू की खेती के लिए मिट्टी की जाँच कितनी जरुरी है जानिए 

     आप कोई भी फसल उगाये उसमे मिट्टी की जांच तो अति आवश्यक है.  मिट्टी की जाँच होने के बाद ही जो खाद और उर्वरक दी जाए उसी के आधार पर हमें खाद और उर्वरक इस्तेमाल करने चाहिए. अन्य फसलों के लिए हम जैसे मिट्टी का प्रयोग करते है उसी तरह से और उसी सावधानी से आलू की खेती करने ke लिए भी मिट्टी की जांच करवाइए. (मिट्टी की सैंपल कैसे ले

       मिट्टी की जांच करने का तरीका क्या है 

   आपका मिट्टी का नमूना जब प्रयोगशाला मे पहुंच जाता है तो सबसे पहले प्रयोगशाला मे मिट्टी की अम्लिता और क्षरिता का विश्लेषण होता है. और उस  विश्लेषण के आधार पर मिट्टी का ph -7 से निचे होता है तो मिट्टी  अमली है और 7 से ऊपर होता है तो मिट्टी क्षरिता मानी जाती है. इसलिए आलू की खेती के लिए 6.5 ph को सही माना जाता है. उसके बाद उपलब्ध नाइट्रोजन,  उपलबध फॉस्फेट,  कितना उपलबध है और उसके आधार पर निम्न उर्वरक स्तर,  माध्यम उर्वरक स्तर,  उच्च उर्वरक स्तर उसके हिसाब से मिट्टी को अलग अलग विभाजित किया जाता है.  
     उसी के आधार पर खाद और उर्वरक कौन सा डाले उसकी डिटेल्स पूरी प्रयोगशाला मे मिल जाती है. मिट्टी का टेस्ट करने का सभी फसल का एक ही तरीका है. 

आलू की मुख्य प्रजातियां कौन कौन सी है 

     आलू की मुख्य 2 प्रजातियां है. 
1 - वह प्रजातियां जो सब्जी मे काम आती है 
2-  वह प्रजातियां जी इंडस्ट्री मे चिप्स और पापड़ जैसे                व्यंजन  बनाने के काम आती है 

सब्जी मे काम आने वाली प्रजातियां 

    सब्जी मे कोफ़्री,  चंद्रमुखी, कोफ़्री अशोका, कोफ़्री वहार,  कोफ़्री वशाह,  कोफ़्री आनंद,  कोफ़्री पुकराज यह बहुत ही अच्छी जातियां है जिनका अधिक प्रयोग किया जाता है. 

इंडस्ट्री मे काम आने वाली प्रजातियां 

   इंडस्ट्री मे काम आने वाली प्रजाति मे कोफ़्री चिप सोना -1,  कोफ़्री चिप सोना -2 यह दो जातियाँ इसके लिए इस्तेमाल की जाती है.  

आलू की खेती के लिए बीज का चुनाव कैसे करें 

   आलू के बीज के लिए सबसे पहले यह देखना चाहिए की आलू का जो कंद है जहा से उसका अंकुरण होगा वह सुरक्षित है की नहीं है उसकी तपास करें.  40 से 50 ग्राम का जो हमारा आलू होता है अथवा 35 सेंटीमीटर के करीब जिसका रेडियस होता है वह आलू हमारा 30 से 35 क्विंटल आलू पर हेक्टर बुआई के लिए पर्याप्त होता है. 
     

आलू की खेती करने के लिए बीज की बुआई कैसे करें 

     अच्छी आँख वाले आलू को बीज के लिए चयन कर लिया जाता है जो खेत हमारा तैयार हो गया है उसमे जो हमारे कुण्ड बनाये जाते है और उसमे पँख से पँख की दूरी 7 सेंटीमीटर और बीज से बीज की दूरी 20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. 
     ताकि जब हम पहली सिंचाई करें तो खेत पूरा पानी से ना भर जाये. बीज को बोट समय हमें यह ध्यान रखना है की जो कुंड मे हम बीज बो रहे है उसमे बीज 8 सेंटीमीटर गहरा बोना चाहिए. ताकि अंकुरण के लिए पर्याप्त नमी बीज को प्राप्त हो सके. 

बुआई के बाद फसल आने मे कितना समय लगता है 

   यदि हम अगैती फसल लेना चाहते है तो 15 सितंबर के आसपास आलू बो देना चाहिए. अगैती मे आलू जल्दी बन जाता है. अगैती फसल बेचने के लिए ही ली जाती है लेकिन जो कोल्ड स्टोरेज मे आलू रखना चाहते है उनके लिए 15 ओक्टोबर से 25 ओक्टुबर का सही समय रहता है. 

आलू की फसल मे सिंचाई कैसे होती है 

     आलू की खेती मे जो पहली सिंचाई है उसको अधिक आवस्यकता देनी चाहिए. पहली सिंचाई मे जो कुंड मे आलू बोया है वह 2/3 से ज्यादा नहीं भीगना चाहिए. पूरा कुंड भीग जाता है तो धीरे धीरे नमी ख़त्म होंगी और जमीन कठोर हो जाएगी तो अंकुरण प्रभावित नहीं होगा इसिलए पहली सिंचाई मे जो नालिया बानी है उसी मे पानी दीजिये. 
     नाली से पानी इस तरह दीजिये की 2/3  जितना कुंड की पानी से संतृप्त हो. ताकि बीज  को नमी भी मिल जाए और अंकुरण के लिए मिट्टी भी ऊपर भुरभुरी रहे. 
    यदि आलू बो दिया है और बरसात हो जाती है तो यदि थोड़ी वर्षा हुई है तो उसका कोई ख़ास असर नहीं पड़ता है यदि ज्यादा वर्षा हुई है तो उसका बीज पर विपरीत असर पड़ता है. पहली सिंचाई करने के बाद हर 10 से 15 दिन के अंदर सिंचाई करनी चाहिए. इस तरीके से 7 से 8 सिंचाई आलू के लिए पर्याप्त होती है. 
    पहली सिंचाई के बाद ख़ड़प्तवार निकल ते है तो उसकी निकल की व्यवस्था कर देनी चाहिए. और कुंड के बाहरी भाग पर थोड़ी मिट्टू भी चढ़ा देनी चाहिए. 

आलू की खेती मे कौन से खड़पातवार होते है 

  आलू की खेती मे रवि पाक मे होने वाले सभी ख़ड़प्तवार होते है. थुवा और विशेषकर बथुवा ज्यादा जमता है. 

ख़ड़प्तवार का निकल कैसे करें 

    खड़पातवार की निकाई गुड़ाई करके उसको खेत से दूर किया जा सकता है. या फिर इन पर रसायनो का प्रयोग करके इनको ख़त्म कर दिया जाता है. 

   जितनी भी कंद वाली फसल होती है उनमे मिट्टी मे फॉस्फोरस पर्याप्त मात्र मे होना आवश्यक है. क्योंकि जो कंद वाली फैसले होती है उसमे फॉस्फोरस की वजह से ही उसका आकर बढ़ता है. नाइट्रोजन का काम है पौधे के हरे भाग को बढ़ाना फॉस्फोरस का काम है आलू मे कंद को बड़ा करना और पोटाश  का काम है पौधे की रोग प्रतिकारक क्षमता बढ़ाना. 

आलू की खेती मे खाद की मात्रा कितनी रखे 

     300 क्विंटल पर हेक्टर गोबर की खाद या कम्पोस्ड की खाद या कूला कारकाड की सड़ी हुई खाद अथवा गन्ने की मील से लाई हुई अच्छी करके सड़ी हुई खाद आपने यदि तैयार की है तो आप उसका भी इस्तेमाल कर सकते है. 
     आलू की फसल की जुताई करने से पहले खाद को खेतार मे बिखेरकर 2 जुताई और कर देनी चाहिए. उसके बाद खेत को खुला छोड़ देना चाहिए.  खेत को खुला छोड़ देने के बाद उसमे सिंचाई करनी चाहिए जिससे पर्याप्त मिट्टी मे खाद मिल जाये. 

टॉप ड्रेसिंग क्या है जानिए 

     टॉप ड्रेसिंग का मतलब फ़र्टिलाइज़र को हम हाथो से छिड़काव करते है उसे वैज्ञानिक भाषा मे टॉप ड्रेसिंग कहते है. 







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