2020 general knowledge / शरीर के अनुपात में सबसे लंबी चोंच एक दक्षिण अमेरिकी पक्षी टुकान की है

(1)  शरीर के अनुपात में सबसे लंबी चोंच एक दक्षिण अमेरिकी पक्षी टुकान की है। और उसकी लम्बाई इतनी बड़ी होने का कारण क्या है यह जानने के लिए पूरी पोस्ट पढ़े।

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              अमेरकी प्रदेशो में होता हुआ तुकान पक्षी लगभग 60 सेंटीमीटर लम्बा होता है।  और उसकी चोंच का फैलाव 21  सेंटीमीटर से कम नहीं होता है। यह पक्षी शाकाहारी होता है और भोजन मो उसको प्रत्येकदिन 45 – 50 फलो की जरुरत पड़ती है , इसकी वजह से वर्षो पहले यह धारणा हुई की लम्बी चांच फलो को पकड़ने और उसकी छाल निकालने में मददरूप बनती होगी।  यह पक्षी की इतनी बड़ी चोंच संभवत : मादा पक्षी को आकर्षित करने के लिए भी हो सकती है ऐसा अनुमान भी कई प्रकृतिविदो ने लगाया है।  

                  हम दोनों तर्कों को देखे तो यह अधूरा तर्क है  ऐसा लगता है क्योकि टुकान के जैसे तोता भी शाकाहारी पक्षी है और वह शाकाहारी भी है और ऐसे पक्षी को लम्बी चोंच की जरुरत नहीं पड़ी है।  यदि लम्बी चोंच के पीछे का हेतु मादा को आकर्षित करने का हो तो यह नुस्खा पक्षिजगत के दूसरे सभ्य ” netural selection ” के तरीके अपनाते , परन्तु ऐसा हुआ नहीं है। ऐमेज़ॉन  जैसे बड़े जंगल में तो बड़ी चोंच समस्या पैदा करदे ,इसीलिए तो चोंच को देखके हम यह अनुमान लगा सकते है की टूकान  चोंच मोटरकार के रेडिएटर जैसा कार्य बजाती है। ज्यादा शारीरिक गर्मी का वहन  करता रक्तप्रवाह चोंच में आने के बाद चोंच की विस्तृत सपाटी द्वारा उस गर्मी का वातावरण में निकल होने लगता है।  इंफ्रारेड थर्मल केमेरा से ली हुई इमेज ने प्रकृतिनिष्णांतो के तर्क को सही ठहराया।   तापमान जहा पर एकदम बढ़ाया जा सके या एकदम घटाया जा सके ऐसे बने  एक ख़ास रूम में गर्मी में चोंच की रक्तवाहिनियां एकदम चौड़ी हो गई , इसलिए चोंच के द्वारा पुष्कल  गर्मी  का व्यय होने लगा।  और उसके बाद एयर कंडीशन के द्वारा कमरे का तापमान बहुत ही कम कर दिया गया तो चोंच में रक्तवाहिनिओ का संकुचन होने लगा , इसका मतलब वह पर रक्तप्रवाह काम होने लगा। यह फेरफार टूकान के शारीरिक तापमान को काम होते हुए से रोकना जरुरी था।  

              मतलब , टूकान पक्षी को मिली लम्बी चोंच  उसके शरीर के शारीरिक तापमान के उतर चढाव को  रोकने के लिए दिया गया है  निष्णांतो ने साबित किया 

 (2 )हाल ही के दिनों में प्लूटो में नए उपग्रह मिले है यह देखते हुए क्या उसे फिर से ग्रह का दरजा नहीं देना चाहिए ? प्लूटो की भ्रमणकक्षा सभी ग्रहो से भिन्न होने का क्या कारन हो सकता है ? 

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          जानेमाने खगोलशास्त्री क्लाइड टॉमबॉय उन्होंने 1930 में खोज निकले हुए प्लूटो जो आठंवा ग्रह नेप्च्यून से महत्तम 12 अबज किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में है। ग्रह को इतना दूर माना जाता है कि इसका नाम मृत्यु के देवता प्राचीन रोमन पौराणिक कथाकार प्लूटो के नाम पर रखा गया है, क्योंकि हम प्लूटो को यमराज के नाम से जानते हैं। प्लूटो के चंद्रमाओं को दिए गए नाम भी यमलोक की रोमन पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं। 1978 में खोजा जाने वाला पहला प्लूटो उपग्रह, केर्न रोमन था, जिसे एक नाविक माना जाता था।  किसका काम मृतकों की आत्माओं को नदी के विपरीत किनारे यमलोक में ले जाना है। इसीलिए प्लूटो के दूसरे चंद्रमा का नाम स्टिकर्स है।  तीसरी चंद्र छाया रोमन देवी निक्स के नाम पर है , जबकि अगले चंद्रमा का नाम कर्बेरोस है। पौराणिक कथा के अनुसार, यह नरक के रक्षक कुत्ते का नाम है। प्लूटो के पांचवें चंद्रमा, हाइड्रा को आठ सिर वाले दानव के रूप में जाना जाता है।  ग्रीक पौराणिक कथाओं के अनुसार, वह निर्दोष लोगों को मारता है, और अंत में हरक्यूलिस उसे मारता है।


           प्लूटो के चारों ओर कारबोरस और स्टिकर चंद्रमा क्रमशः 2011 और 2012 में पाए गए थे।  अब प्लूटो के पांच उपग्रह हो चुके है तो अब कई खगोलविदों का मानना है की 2006 में प्लूटो के पास से ले लिया हुआ ग्रह का दरज्जा अब उसको वापस दे देना चाहिए। प्लूटो के उपग्रह की संख्या देखते हुए प्लूटो को ग्रहो के निचले हिस्से में रखना ठीक नहीं होगा।  दूसरी तरफ कई जानकारों का ऐसा भी मंतव्य है की प्लूटो हमारे सूर्यमण्डल का जन्मजात सभ्य नहीं है। बुध ग्रह से लेके नेप्ट्यून तक सभी ग्रहो की भ्रमणकक्षा से प्लूटो की भ्रमणकक्षा 17 अंश टेढ़ी है।  इसलिए सूर्यमाला रचने के उपरांत बाह्य आवकाशी प्लूटो को सूर्य ने अपने गुरुत्वाकर्षण से खिंच लिया होगा ऐसा भी हो सकता है।  


(3) प्रथम अंतरिक्षयात्री यूरी गागरिन ने यात्रा दरमियान अपने साथ पिस्तौल राखी थी क्या यह बात सच है ? 

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यह बात पूर्णतः सत्य है , लेकिन यह गुप्त बात का खुलासा  यूरी गागरिन ने कई सालो बाद 12 अप्रैल 1961 के दिन किया था।  अंतरिक्षयान की यह पहली मानवीय यात्रा थी , जिसके बारे में रसियानो के पास भी कोई  सचोट माहिती नहीं थी।  सबसे बड़ी चिंता यात्रा के अंत होने पर यूरी गागरिन जिसमे शामिल थे वह यान वस्तोक -1  धरती में कहा पर लैंड होगा उसके ऊपर थी।  यदि 28,620 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा करने वाला एक अंतरिक्ष यान थोड़ी देर या थोड़ी देर बाद पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो यह हमारी अपेक्षा से सैकड़ों या हजारों किलोमीटर दूर तक उतरने की संभावना थी। यह भी हो सकता था की गागरिन की लैंडिंग रशिया  के किसी शत्रु देश में हो जाए तो   स्थानीय लोग उसके साथ थर्ड – डिग्री टॉर्चर करने लगे तो 

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 इसलिए रशियनो ने उसके आत्मरक्षण के लिए 9. 00 m .m. करतूसवाली मकोराव प्रकार की सेमि – आटोमेटिक पिस्तौल दी हुई थी।  मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं और वह यान रशिया में ही लैंड हुआ।  























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